CG TRANSFER BREAKING : ACB raid officer returns to Bilaspur
बिलासपुर, 27 फरवरी 2026। बिलासपुर के तत्कालीन तहसीलदार रहे नारायण प्रसाद गबेल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जमीन मामलों को लेकर विवादों में रहे और एसीबी की कार्रवाई झेल चुके गबेल का राज्य सरकार ने दोबारा बिलासपुर जिला मुख्यालय में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तबादला कर दिया है। करीब डेढ़ साल बाद उनकी उसी जिले में वापसी से प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव क्लेमेंटीना द्वारा जारी आदेश में गबेल को डिप्टी कलेक्टर के पद पर बिलासपुर में पदस्थ किया गया है। खास बात यह है कि आदेश में उन्हें एकतरफा रिलीव भी कर दिया गया है। यानी वे जब चाहें बिलासपुर पहुंचकर कलेक्टर के निर्देश पर ज्वाइन कर सकते हैं।
जमीन मामलों को लेकर रहे विवादित
तहसीलदार के रूप में कार्यकाल के दौरान गबेल पर जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी और कथित अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 80 वर्षीय मंगतीन बाई का मामला उस समय काफी चर्चा में रहा। मंगतीन बाई ने चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 214/10, 214/5 और 214/9 की जमीन पर अपने पूर्वजों का अधिकार बताते हुए नामांतरण की मांग की थी।
राजस्व रिकॉर्ड में साक्ष्य नहीं दे पाने के आधार पर उनका दावा निरस्त कर दिया गया था। बाद में तहसील कार्यालय के चक्कर काटती रहीं मंगतीन बाई को लेकर पुलिस को पत्र लिखे जाने और उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताने की बात भी सामने आई थी, जिससे विवाद और गहरा गया था।
एसीबी की एफआईआर और हाई कोर्ट की दखल
24 जून 2021 को एसीबी ने नारायण गबेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। बिलासपुर निवासी सूरज सिंह यादव ने जांच में देरी का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट पिटिशन दायर की थी।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जांच तीन सप्ताह में पूरी करने और चार सप्ताह में अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इस प्रकरण के बाद भी मामला समय-समय पर चर्चा में रहा।
अब डिप्टी कलेक्टर के रूप में बिलासपुर में उनकी दोबारा पदस्थापना से पुराने मामलों की याद फिर ताजा हो गई है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जिस जिले में विवाद और जांच का दौर चला, वहीं दोबारा पदस्थापना के पीछे क्या वजह रही।

