PRAYAGRAJ POCSO CASE : नार्को टेस्ट भी कराएं – शंकराचार्य

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PRAYAGRAJ POCSO CASE : Get narco test done too – Shankaracharya

प्रयागराज/वाराणसी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ दर्ज कथित यौन उत्पीड़न के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच इस मामले को सुनेगी।

मामला बटुकों (शिष्यों) के साथ कुकर्म के आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में शंकराचार्य के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद और अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।

शंकराचार्य बोले – “नार्को टेस्ट भी कराएं”

सुनवाई से पहले वाराणसी में मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, “सत्य की जीत होगी। यदि सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट की जरूरत पड़े तो वह भी कराया जाए। अगर फैसला पक्ष में नहीं आता तो हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।”

कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह पूरा मामला प्रयागराज में माघ मेले के दौरान सामने आया। तुलसी पीठाधीश्वर Swami Rambhadracharya के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

आरोप है कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान बच्चों के यौन शोषण की घटनाएं हुईं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेडिकल जांच में कुकर्म की पुष्टि होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

वकील को धमकी, आरोपी गिरफ्तार

मामले के बीच शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को कचहरी को बम से उड़ाने और जान से मारने की धमकी मिली थी। पुलिस ने 20 घंटे के भीतर आरोपी अजीत कुमार सरोज को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने पड़ोसी को फंसाने के लिए धमकी भरा संदेश भेजा था।

घटनाक्रम की टाइमलाइन

18 जनवरी : माघ मेले में प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद।

24 जनवरी : पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत।

21 फरवरी : कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में केस दर्ज।

24 फरवरी : हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर।

26 फरवरी : मेडिकल रिपोर्ट पर चर्चा और एक कथित पीड़ित का बयान सामने आया।

फिलहाल सबकी नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत का फैसला इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेगा।

 

 

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