CG POLITICS : Deputy CM Arun Sao’s distance from two big platforms, are the equations changing?
कोरबा, 17 फरवरी 2026। राजनीति में अनुपस्थिति भी कभी-कभी सबसे बड़ा बयान बन जाती है। कोरबा में पिछले पखवाड़े कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव लगातार दो अहम आयोजनों से दूर रहे। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहा है क्या यह महज व्यस्तता थी या फिर कोई सियासी संकेत?
पहला मौका: ‘अटल स्मृति’ भूमिपूजन
2 फरवरी को भाजपा के नए कार्यालय ‘अटल स्मृति’ का भूमिपूजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन प्रभारी मंत्री अरुण साव मंच पर नजर नहीं आए।
इस आयोजन के दौरान मंच के पोस्टर बदले जाने को लेकर भी खासा चर्चा रही। मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले मंत्री लखनलाल देवांगन और जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के पोस्टर हटाकर पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का पोस्टर लगाया गया। यह बदलाव हाईकमान का संकेत था या स्थानीय शक्ति संतुलन का इशारा इस पर अभी भी चर्चा जारी है।
दूसरा मौका: पाली महोत्सव
15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित पाली महोत्सव में भी डिप्टी सीएम साव को मुख्य अतिथि बनाया गया था। महोत्सव का शुभारंभ उन्हें करना था, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
ऐसे में मंत्री लखनलाल देवांगन को उद्घाटन और समापन दोनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ी। आयोजन भले ही सफल रहा, लेकिन प्रभारी मंत्री की अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र बन गई।
राजनीतिक गलियारों में उठते सवाल
लगातार दो बड़े आयोजनों से दूरी को केवल संयोग मानना आसान नहीं। कोरबा की राजनीति में इसे बदलते समीकरणों की आहट के तौर पर भी देखा जा रहा है।
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक व्यस्तता थी? या फिर स्थानीय स्तर पर नए शक्ति संतुलन की शुरुआत?
फिलहाल जवाब भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि कोरबा की सियासत में ‘खाली मंच’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

