Indore contaminated water: इंदौर में खत्म नहीं हो रहा दूषित पानी का कहर, उल्टी-दस्त के 65 नए मरीज मिले

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Indore contaminated water: इंदौर। देश के सबसे स्वच्छतम शहर इंदौर में दूषित पेयजल से 16 लोगों की मौत और एक हजार से अधिक लोगों के बीमार होने के बीच नगर निगम सात दिन बाद भी भागीरथपुरा क्षेत्र में साफ-स्वच्छ नर्मदा जल उपलब्ध नहीं करा पाया है। रहवासी अब भी पूरी तरह टैंकरों पर आश्रित हैं। शनिवार को एक टैंकर में काई व जंग मिलने के बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और पानी लिए बिना ही टैंकर लौटा दिया गया।

शनिवार को उल्टी-दस्त के 65 नए मरीज मिले

वहीं, शनिवार को उल्टी-दस्त के 65 नए मरीज मिले। इनमें से 15 को अस्पतालों में भर्ती किया गया, शेष को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजा गया। वर्तमान में 149 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 20 आइसीयू में हैं। इसबीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने क्षेत्र का सघन दौरा किया और अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अब हैजा की आशंका बढ़ गई है। शनिवार को 13 वर्षीय एक बच्चे में हैजा की पुष्टि हुई। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मल-मूत्र मिला पानी रों तक कैसे पहुंचा।

अस्पताल में भर्ती कई मरीजों में किडनी-लिवर तक संक्रमण फैल गया है। अस्पताल में भर्ती संतोष बाई की किडनी तक संक्रमण पहुंच गया है। इसी प्रकार 17 वर्ष के पवन के लिवर में संक्रमण बताया गया है। इन मरीजों का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। डिस्चार्ज के बाद भी 20 प्रतिशत लोगों को दोबारा अस्पताल में करना पड़ रहा भर्तीडिस्चार्ज होने के बाद भी करीब 20 प्रतिशत लोगों को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके स्वजन में डर और चिंता है।

स्वजन का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं। मरीजों को समय पर दवाइयां दी जा रही हैं और घर में केवल उबला हुआ पानी ही पिलाया जा रहा है। इसके बावजूद तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है। भागीरथपुरा निवासी रजनी तीन दिन तक अरबिंदो अस्पताल में भर्ती थीं। शुक्रवार को उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज दिया, लेकिन अगले दिन शनिवार को फिर तबीयत बिगड़ गई। इस पर दोबारा अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्वजन ने बताया कि अस्पताल से आने के बाद से ही सिर दर्द, पेट दर्द, उल्टी की समस्या हो रही है। इलाज के बाद भी तबीयत बिगड़ती जा रही है।

डॉक्टरों ने जिस तरह देखभाल के लिए कहा था, हमने उसका भी पालन किया। फिर भी आराम नहीं मिल रहा। मरीजों को देनी पड़ रही दोगुनी एंटीबायोटिक भागीरथपुरा निवासी दीपक कुशवाह ने कहा कि मैं करीब पांच दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत से परेशान हूं। पिछले तीन दिन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दी गई दवाई खा रहा हूं, लेकिन कोई आराम नहीं मिल रहा है। बार-बार यहां समस्या लेकर आ रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक भागीरथपुरा से जो मरीज आ रहे हैं, उनमें उल्टी-दस्त की शिकायत सामान्य मरीजों से अलग है। यहां के मरीजों को एंटीबायोटिक भी दोगुनी देनी पड़ रही है।

राजनीतिक टकराव

कांग्रेस-भाजपा आमने-सामनेशनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। कांग्रेस नेता प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। नारेबाजी, धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल फेंके जाने तक हालात बिगड़े।

पुलिस सुरक्षा के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार, प्रताप ग्रेवाल बस्ती में दाखिल हुए, तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर स्थिति संभाली और दो विधायकों सहित 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीएनएस की धारा 170 में गिरफ्तार कर लिया। करीब एक घंटे बाद सभी को छोड़ दिया गया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण में घटनाएं दबाई जा रही हैं, जबकि भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया। सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हंगामा करवाने के लिए किराये के बदमाश बुलाकर कांग्रेस नेताओं पर हमले की कोशिश की।

पेयजल में मिले ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया
भागीरथपुरा में जिस दूषित पेयजल से 16 लोगों की मौत हुई, उसकी एमजीएम मेडिकल कालेज में हुई जांच में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मिले हैं। शनिवार को बैक्टीरिया की विस्तृत जांच के लिए कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ बैक्टीरियोलाजी (एनआइबी) से विज्ञानियों की टीम इंदौर पहुंच गई है।

वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम भी इंदौर पहुंची। मिशन की एमडी डा. सलोनी सिडाना ने चाचा नेहरू अस्पताल, एमवाय अस्पताल और भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों से चर्चा की और डाक्टरों से इलाज की जानकारी ली।

इस दौरान स्टाफ, इलाज, रेफरल मैकेनिज्म, औषधियों की उपलब्धता, रिकार्ड संधारण को देखा। इलाज करने वाले डाक्टरों से यह भी पूछा कि दवाई का कौन-सा डोज कितनी मात्रा में मरीजों को दिया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने डाक्टरों से कहा कि सभी मरीजों को यह नहीं कहना है कि पानी में घोलकर ओआरएस पीएं, उन्हें यह कहना है कि उबले हुए पानी में ओआरएस मिलाकर पीएं।

 

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