2 साल में दो “सुपर CM”: कौशल्या साय के बाद अब तुलसी कौशिक, छत्तीसगढ़ की सत्ता में बढ़ता “सुपर CM” कल्चर!

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रिपोर्ट: दीपक तिवारी

छत्तीसगढ़।राज्य की राजनीति में एक नया शब्द तेज़ी से चर्चा में है— “सुपर CMबीते दो वर्षों में यह दूसरा मौका है जब मुख्यमंत्री के समान प्रभाव रखने वाले नाम सामने आए हैं। पहले कौशल्या साय और अब तुलसी कौशिक को लेकर सियासी गलियारों में जबरदस्त चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के कई अहम फैसलों में इन नेताओं की भूमिका मुख्यमंत्री से कम नहीं मानी जा रही। प्रशासनिक बैठकों से लेकर राजनीतिक रणनीति तक, इनकी मौजूदगी और दखल साफ़ दिखाई देता है।

पहले कौशल्या साय, अब तुलसी कौशिक

बताया जाता है कि पहले कार्यकाल में कौशल्या साय को सत्ता का मजबूत केंद्र माना गया। कई विभागों में उनकी पकड़ और फैसलों पर असर की बातें आम रहीं।अब वही चर्चा तुलसी कौशिक को लेकर हो रही है। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में उनकी सक्रियता ने उन्हें “सुपर CM” की छवि दिला दी है।

क्या मुख्यमंत्री कमजोर हो रहे हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के “सुपर CM” उभरना इस बात का संकेत है कि सत्ता का केंद्र धीरे-धीरे बंट रहा है। इससे एक तरफ संगठन मजबूत दिखता है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल भी खड़े होते हैं।

विपक्ष का हमला

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए कहा है कि “छत्तीसगढ़ में अब सरकार मुख्यमंत्री नहीं, सुपर CM चला रहे हैं।”
विपक्ष का आरोप है कि सत्ता के अंदर शक्ति संतुलन बिगड़ रहा है और इसका असर सीधे प्रशासन व जनता पर पड़ सकता है।

जनता के मन में सवाल

  • सबसे बड़ा सवाल यह है कि
  • असली फैसले कौन ले रहा है?
  • जिम्मेदारी किसकी होगी?
  • और अगर सरकार विफल होती है, तो जवाबदेह कौन होगा?

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