कवर्धा। जिले के जल संसाधन विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बांध निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर एरिया फ्री दिखाकर, फर्जी बिल, बनावटी मापपत्र व कागज़ी कार्य के माध्यम से भारी हेराफेरी की गई है। सूत्रों का दावा है कि जिस एरिया को अधिग्रहित बताया गया, वहाँ आज तक एक इंच भी काम नहीं हुआ, लेकिन भुगतान पूरा उठा लिया गया।
जानकारी के अनुसार विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर ऐसी योजना बनाई कि कागजों में बांध पूरा बन गया, मगर ज़मीन पर अभी तक पत्थर तक नहीं लगा। अभी तक वन विभाग का noc नहीं मिला है दोनों कार्यों पर देखने से नहीं लगता कि समाज सीमा के अंदर मांग कर बनकर तैयार हो जाएगा
कथित तौर पर:
फर्जी मटेरियल सप्लाई बिल पेश किए गए
मशीनरी किराये के कागजात मनगढ़ंत तरीके से बनाए गए
एरिया फ्री करने के नाम पर लाखों की फर्जी पेमेंट
नापतौल में भारी गड़बड़ी, माप पुस्तिका में सीधा हेरफेर
भूमिपूजन के बाद से आज तक ठेका स्थल पर न पुरुष दिखा, न मशीन
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी जब भी निरीक्षण पर आते हैं, तो उन्हें दूर ही रोक दिया जाता है। “कागज पूरा है, बस काम जल्दी शुरू होगा” जैसे बहाने महीनों से सुनाए जा रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि यह हेराफेरी कुल मिलाकर 5 से 15 करोड़ रुपये तक की हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल—
जब बांध की प्रगति शून्य है, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
वहीं, विभागीय उच्च अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साध रखी है। जिले में चर्चा गर्म है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई अधिकारियों की कुर्सी हिल सकती है।

