शिवरीनारायण। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शिवरीनारायण में ओपीडी के नाम पर अवैध वसूली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराज़गी फैल गई है। मरीजों और ग्रामीणों के आरोपों के मुताबिक़ केंद्र पर दवाइयों की कमी, वार्ड-बॉय व फार्मासिस्ट का अभाव और गंदगी-भरा टूटा शौचालय जैसी अनियमितताएँ लंबे समय से बनी हुई हैं, जबकि सरकार द्वारा मिलने वाला जीडीएस (GDS) फंड असरदार रूप से उपयोग नहीं हो रहा है।
ओपीडी के नाम पर वसूली, स्टाफ जवाब देने से बचा
दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच की टीम जब स्वास्थ्य केंद्र पहुँची तो वहां मरीजों की कतार लगी हुई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि ओपीडी के बहाने 5–10 रुपये तक वसूली की जा रही है। टीम द्वारा पूछताछ पर स्टाफ गोलमोल जवाब देता दिखा और किसी بھی स्पष्ट जानकारी से बचता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि “गर्भवती महिलाओं और 60 वर्ष से ऊपर के लोगों से शुल्क नहीं लिया जाता — पर बाकी मरीजों से मनमानी वसूली हो रही है।”
बुनियादी सुविधाओं की दयनीय स्थिति
स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य केंद्र की निम्न स्थिति बताई:
आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध नहीं। सामान्य बुखार की टैबलेट भी नहीं ।
फार्मासिस्ट व वार्ड-बॉय की कमी; ड्रेसर नहीं होने से प्राथमिक उपचार प्रभावित।
अस्पताल की सफाई दयनीय; शौचालय टूटे-फूटे व गंदे।
ग्रामीणों का कहना है कि “यह अस्पताल सिर्फ़ नाम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रह गया है — असल में सुविधाएँ नदारद हैं।”
जीडीएस फंड की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह
स्थानीय लोगों ने विवाद उठाया कि जब हर साल लाखों रुपये जीडीएस के रूप में उपलब्ध कराये जाते हैं, तो अस्पताल में स्टाफ, दवाइयाँ और साफ-सुथराई का अभाव कैसे बने रहता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं — “पैसा कहां जा रहा है?”
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्र की विस्तृत जांच करायी जाए तथा यदि अवैध वसूली और कुप्रबंधन पाया गया तो जिम्मेदार चिकित्सा प्रभारी व प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा — “सरकारी अस्पताल जनता की सेवा के लिए है, कमाई के लिए नहीं।”
चिकित्सा प्रभारी का उत्तर
जब चिकित्सा प्रभारी अनीता ध्रुव से जानकारी माँगी गई तो उन्होंने उत्तर देने से इनकार कर कहा: “कुछ भी जानकारी नहीं दूंगी — आपको जो छापना है, छाप दीजिए।”

