CG NAN GHOTALA : High Court dismisses all PILs related to the Naan scam
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने 2015 के चर्चित नान घोटाले से जुड़ी सभी जनहित याचिकाओं (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला 10 साल से अधिक पुराना है और अब जांच एजेंसी बदलने की मांग उचित नहीं है। विचारण अब अंतिम चरण में है।
सुनवाई का विवरण
शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस पीपी साहू की विशेष डिवीजन बेंच में 8 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में नान घोटाले से संबंधित याचिकाओं के निराकरण के बाद हाई कोर्ट में सुनवाई संभव हो पाई।
कोर्ट ने नोट किया कि केवल दो याचिकाओं में ही अधिवक्ता या याचिकाकर्ता उपस्थित थे। अन्य याचिकाओं की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक की ओर से अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय उपस्थित थे।
अधूरी जांच और मुख्य मुद्दे
याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि एसीबी की जांच आधी अधूरी रही। कई लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि उनका सीधा-सीधा रोल था। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियुक्त मुनीश कुमार शाह तक अब तक गिरफ्तार नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में धारा 319 के तहत विचारण न्यायालय में आवेदन किया जा सकता है और अब जांच एजेंसी बदलना उचित नहीं है।
नान घोटाले का संक्षिप्त विवरण
नान घोटाला छत्तीसगढ़ के पीडीएस (राशन वितरण) सिस्टम में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है।
55 लाख परिवार होने के बावजूद 70 लाख राशन कार्ड बनाए गए।
घटिया क्वालिटी के आयोडाइज्ड नमक में कांच के टुकड़े पाए गए।
27 जिला प्रबंधक और अन्य उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी में विलंब और जांच में कई उच्च अधिकारियों को छोड़ दिया गया।
राजनीतिक विरोध
2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद एसआईटी जांच का गठन हुआ। भाजपा नेता धरमलाल कौशिक और बाद में विक्रम उसेंडी ने जनहित याचिका के माध्यम से सीबीआई जांच के खिलाफ विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
इससे पहले ईडी की याचिकाओं के कारण हाई कोर्ट में सुनवाई पर रोक थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन याचिकाओं के निराकरण के बाद जनहित याचिकाओं पर सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।

