CG NEWS: Big step by state agitators, campaign to promote forest and agriculture based small scale industries started
रायपुर। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा, राज्य आंदोलनकारी संगठन के संलग्न भगवान बिरसा मुण्डा वन कृषि आधारित उत्पादन समिति के बैनर तले राज्य आंदोलनकारी सर्वश्री दीनदयाल वर्मा, जी.पी.चंद्राकर, जागेश्वर प्रसाद, अनिल दुबे, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन, महेन्द्र कौशिक, बुधराम सिंह कंवर, वेगेन्द्र सोनबेर, गोवर्धन वर्मा, बृजबिहारी लाल साहू, भुवनलाल पटेल, छन्नू साहू, अशोक कश्यप, श्यामूराम सेन जैसे राज्य आंदोलनकारियों ने छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र अमरकंटक से लगे कुईकुकदूर के आदिवासियों के यहां हुए भूषण दुर्घटना में 19 आदिवासी तेन्दूपत्ता तोड़ने वाले मजदूर की दुर्घटना में मृत्यु पर ग्रामवासियों के निवेदन पर ठोस कार्यक्रम बनाने के निर्णय लेने का निवेदन राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे से बार-बार किया।
जिस पर राज्य आंदोलनकारियों के आंदोलन पर वन और कृषि आधारित लघु उद्योग जिसकी मांग राज्य आंदोलन के समय से चला आ रहा है, उसे प्रयोग में लाने की घोषणा किसान मोर्चा के बैनरतले भगवान बिरसा मुण्डा वन कृषि आधारित उत्पादन समिति का गठन राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे, महेन्द्र कौशिक, जगदम्बा, सुंदर कौशिक, भगत वर्मा के आतिथ्य बैठक में निर्णय लिया गया।
इस पर ग्रामीण शिक्षित नवयुवकों को वन और कृषि आधारित दोना पत्तल मशीन द्वारा लघु उद्योग लगाने का घोषणा की गई। छत्तीसगढ़ी भवन राज्य आंदोलनकारी स्थल पर दीनदयाल वर्मा द्वारा प्रस्ताव गॉव-गॉव वन एवं कृषि आधारित उद्योग को लगाने के लिए आज लगभग 25 वर्ष से राज्य निर्माण के बाद भी क्षेत्र की सुध चुनी सरकार नहीं कर रहीं है। जिस पर राज्य आंदोलनकारी प्रयोग करते हुए छत्तीसगढ़ के चुनिंदा 100 बड़े ग्रामों में कृषि और वन आधारित लघु उद्योग लगाने के निर्णय को अमलीजामा पहना रहे हैं।
जिसमें कबीरधाम जिले के पंडरिया कुईकुकदूर ग्राम सेमहरा में गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलनकारी प्रदेश किसान अध्यक्ष भूतपूर्व रविशंकर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष अनिल दुबे के करकमलों से उद्घाटन किया जायेगा। इस अवसर पर महेन्द्र कौशिक, जगदम्बा साहू, जागेश्वर प्रसाद, वेगेन्द्र सोनबेर हजारों की संख्या में आदिवासी समाज उपस्थित होगा। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए स्वागत द्वार, पंडाल निर्माण के साथ आदिवासी परंपरा अनुसार वाद्ययंत्र, आदिवासी नृत्य का आयोजन किया गया है।
इस अवसर पर कबीरधाम जिले के जिलाधीश सहित क्षेत्र के शासकीय कर्मचारी को भी आमंत्रित किया गया, जिसमें डी.एफ.ओ., तहसीलदार, एसडीएम पंडरिया, थाना प्रभारी भी आमंत्रित हैं। राज्य आंदोलनकारियों ने इस प्रयोग को शनैः-शनैः छत्तीसगढ़ के प्रमुख 100 गाँवों में लगाने का कार्यक्रम सुनिश्चित किया है जो 16 जिलों में लगाया जायेगा, जिसमें बस्तर, जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर, नांदगॉव, दुर्ग, रायपुर, बालोद, धमतरी, कांकेर, प्रमुख हैं।

