BAYAN VIVAD : How can a Yogi remain the Chief Minister? – Shankaracharya
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बयानबाजी को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। दोनों के तीखे बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
शंकराचार्य का पलटवार
एक मीडिया इंटरव्यू में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता से तय नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि “जो योगी बन गया, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। राजा योगी बन सकता है, लेकिन योगी फिर से राजा नहीं बनता। अगर आप योगी हैं तो मुख्यमंत्री पद कैसे स्वीकार कर रहे हैं?”
उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की नियुक्ति गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर होती है, न कि किसी सरकार या मुख्यमंत्री के प्रमाणपत्र से।
सीएम योगी का पक्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा था कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र है, लेकिन इसकी अपनी परंपराएं और नियम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले के दौरान जिस मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा किया गया, वह वास्तविक नहीं था बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश थी। मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सख्त व्यवस्था की थी और किसी को नियम तोड़ने की इजाजत नहीं दी गई।
अखिलेश का भी पलटवार
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विवाद में एंट्री लेते हुए कहा कि सिर्फ गेरुआ वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता और संतों का सम्मान किया जाना चाहिए।
इस बयानबाजी के बाद प्रदेश में सियासी माहौल गर्म है और धार्मिक मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है।

