नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। राज्यसभा और लोकसभा में पहले दिन जोरदार हंगामा देखने को भी मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे के चलते स्थगित भी करनी पड़ी। वहीं सोमवार को राज्यसभा में हंगामा और उपद्रव करने वाले 12 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। बताते चले कि, इन सभी 12 सांसदों को 11 अगस्त को राज्यसभा में हंगामा करने के लिए निलंबित किया गया। जिसको लेकर अब विपक्ष दलों और सत्ता पक्ष के बीच राज्यसभा में घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने राज्यसभा के 12 विपक्षी सांसदों के निलंबन को रद्द करने की मांग करते हुए संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया।
इस बीच अब सभापति वेंकैया नायडू ने राज्यसभा में हंगामा करने वाले सांसदों को बड़ा झटका दिया है। दरअसल वेंकैया नायडू ने 12 सांसदों के निलंबन को रद्द करने के अनुरोध को खारिज कर दिया है। उन्होंने पिछले मानसून सत्र की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि पहले का अनुभव आज भी हमें परेशान करता है। इसके अलावा पिछले सत्र में जो कुछ भी हुआ था, उस पर नाराजगी व्यक्त करने के लिए सदन की प्रमुख हस्तियों के नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहा था।
इससे पहले मंगलवार को सदन के नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सत्र शुरू होते ही सांसदों का निलंबन वापस लिए जाने की मांग की। बता दें कि जिन सांसदों को निलंबित किया गया है, उनमें कांग्रेस (Congress) के छह, शिवसेना (Shivsena) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 2 सांसद शामिल हैं। इसके अलावा CPM का एक सांसद को निलंबित किया हैं।
निलंबित सदस्य सैयद नसीर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा और कांग्रेस के राजमणि पटेल, प्रियंका चतुवेर्दी, शिवसेना के अनिल देसाई, माकपा के एलाराम करीम, के बिनॉय विश्वम भाकपा, डोला सेन और तृणमूल की शांता छेत्री है।
