When an archer daughter in the valleys of Ladakh declared—”Chhattisgarhiya Sable Badhiya!”…
इन दिनों हम पत्रकारों का एक दल लेह-लद्दाख के दौरे पर हैं, नुब्रा घाटी से लेह लौटते वक़्त, खारदुंग में हम चाय पीने के लिए एक छोटी सी किराना कम डेली नीड्स की दुकान पर रुके तो मेरी नज़र वहाँ रखे ट्रॉफी और सर्टिफिकेट्स पर पड़ी, दुकान संभालने वाली जेगमेट वांगमो ने बताया कि, वो आर्चरी खेलती है और ये सब उसने जीता है। और साथ ही अपने दादा के साथ दुकान भी संभालती है।

जब जेगमेट को पता चला कि हम छत्तीसगढ़ से है तो वो बहुत खुश हुई, उसने बताया कि इसी साल खेलो इंडिया ट्राइबल में भाग लेने वो रायपुर जा चुकी है, टूर्नामेंट में इंतज़ाम शानदार था। उसे छत्तीसगढ़ भी बहुत पसंद आया।
जब हम चाय पीकर वापस बस में बैठने लगे तो जेगमेट चिल्लाई, ‘सर..छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया..’
मैंने कहा, खेले बर अउ आबे नोनी, रईपुर..
जेगमेट ने मुस्कुराते हुए कहा- हव..!!
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