WEATHER NEWS: यूपी में आंधी-बारिश व वज्रपात का कहर, अब तक 14 लोगों की मौत

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WEATHER NEWS: लखनऊ। प्रदेश में मौसम के करवट लेने से बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक कई जिलों में तेज आंधी-बारिश और वज्रपात के बीच 14 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा कई लोग जख्मी भी हैं। मौसम की जबरदस्त मार फसलों पर भी पड़ी है। गेहूं की तैयार फसल को अधिक क्षति पहुंची है। खेत में पानी भरने से गेहूं के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। आम की फसल को आंशिक क्षति हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटे में मौसम यूं ही बदलता रहेगा। तेज हवा चल सकती है और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।

यह स्थिति 12 अप्रैल तक बनी रह सकती है, जबकि 13 अप्रैल को पूर्वी उप्र में भारी बारिश की संभावना है। सीतापुर में बिजली गिरने से गन्ना काटने गए किसान की मौत हो गई। इसके अलावा इसी जिले में ही पक्की दीवार गिरने से महिला की जान चली गई। अमेठी में भी खेत में काम कर रही महिला की मौत वज्रपात की चपेट में आकर हो गई।

गोंडा और फतेहपुर में तीन बालकों की मौत

वज्रपात से गोंडा और फतेहपुर में तीन बालकों की मौत हो गई। महिला समेत पांच झुलस गए। कानपुर देहात में दो किसानों की मौत हो गई। कन्नौज में आंधी में लड़खड़ा रही टिनशेड को थामने के प्रयास में 60 वर्षीय किसान की जान चली गई। टिनशेड उसके ऊपर ही गिर गया। आजमगढ़ में वज्रपात से तीन तो गाजीपुर में एक मौत हुई।

जौनपुर में आंधी से गिरे आम के पेड़ के नीचे दबकर महिला की मौत हो गई। वज्रपात से पूर्वांचल भर में दर्जन भर से अधिक लोगों के जख्मी होने की भी सूचना है। लखनऊ बाराबंकी, सीतापुर, अमेठी, अयोध्या गोंडा समेत सभी जिलों में खेतों में पानी भर गया।

कटी पड़ी गेंहू की फसल को नुकसान

तेज हवा के साथ आई बारिश से कटी पड़ी गेंहू की फसल को नुकसान हुआ है। कानपुर और आसपास जिलों में भी यही स्थिति दिखी। खेतों में खड़ी और कटी पड़ी गेहूं की फसल भीग गई। आंधी के चलते कई जगह पेड़ उखड़ गए। तेज बारिश से उन किसानों की परेशानी बढ़ गई है जिनकी गेहूं की फसल खेत में कटकर पड़ी है।

पूर्वांचल के जिलों में भी गेहूं की फसल खराब हुई है। कई जगहों पर आम के टिकोरे भी गिर गए। लखनऊ के चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डा.सत्येंद्र कुमार सिंह के अनुसार बरसात ने गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया है।

इस बरसात से गेहूं की चमक प्रभावित होगी तो गेहूं बीज की भी गुणवत्ता प्रभावित होगी। रहमान खेड़ा के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के कृषि वैज्ञानिक पीके शुक्ला ने बताया कि आम की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है। बारिश से आम के पेड़ों की धुलाई हो गई, जो लासी समेत अन्य रोगों की रोकथाम में सहायक होगी।

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