ऐसे थे महान शिक्षक राधाकृष्णन: सदन में श्लोक से गुस्सा शांत कराया, विदाई में छात्राें ने उनकी बग्घी खींची

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नई दिल्ली : महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को बेहद सादगी के साथ जीवन जीना पसंद था. छात्रों के बीच अपनी इसी सादगी और ज्ञान के कारण वो काफी पसंद किए गए. उन्हें छात्र कितना पसंद करते थे इसका अंदाजा उनकी विदाई से लगाया जा सकता है. 1921 में जब वो मैसूर यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी छाेड़कर कलकत्ता यूनिवर्सिटी जा रहे थे तो वो काफी भावुक हो गए. इतना ही नहीं छात्रों ने उनकी विदाई को काफी खास बना दिया था.

महाराजा कॉलेज मैसूर के छात्रों ने उनके लिए फूलों से सजी बग्घी लाकर सभागार के बाहर खड़ी की. जब वो यूनिवर्सिटी से बाहर निकले तो बग्गी देखकर चौंक गए. बग्घी में घोड़े नहीं लगे थे. इसे देखकर वो आश्चर्यचकित हुए. उनके बाहर आने के बाद कुछ छात्र आगे आए तो हाथों से बग्घी को खींचने लगे. इस तरह छात्रों ने अपने सबसे प्रिय शिक्षक को मैसूर रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया.

आज उन्हीं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बर्थ एनिवर्सिरी है, जिसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी में जन्मे डॉ.राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी रहे. वो शिक्षक होने के साथ एक दार्शनिक भी थे.

राज्यसभा में सदस्यों का गुस्सा शांत करने का वो खास अंदाज
उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए जब डॉ. राधाकृष्णन राज्यसभा के सत्र की अध्यक्षता करते थे उनके काम करने के अंदाज को काफी सराहा जाता था. वो सदन में होने वाले कोलाहल और विरोध पर शांतिपूर्वक प्रतिक्रिया देते थे. ऐसे मामलों को संभालने के लिए भी उन्हें जाना गया. जब भी सदन का कोई सदस्य दूसरे सदस्य पर आक्रोशित हो जाता था तो डॉ. राधाकृष्णन श्लोक सुनाकर उनका गुस्सा शांत कर देते थे. उनकी इस खूबी की हमेशा सराहना की गई.

जब चीनी तानाशाह ने डॉ. राधाकृष्णन को परोसा मांसाहार
साल 1957 में डॉ. राधाकृष्णन चीन गए थे. उनकी मुलाकात चीन के तानाशाह माओ होनी थी. माओ ने उन्हें अपने घर पर आमंत्रित किया. जब वो घर पहुंचे तो माओ ने उनकी अगवानी की. जैसे ही दोनों मिले तो राधाकृष्णन ने माओ के गाल थपथपा दिए. इस पर माओ चौंके तो उन्होंने कहा, घबराइए नहीं, मैंने स्टालिन और पोप के साथ ही ऐसा प्यार और अपनापन जताया है.

डॉ. राधाकृष्ण शाकाहारी थे. मुलाकात के बाद दोनों के सामने खाना पेश किया गया. माओ ने प्रेम दर्शाने के लिए अपनी चॉपस्टिक से डॉ. राधाकृष्णन की थाली में पके हुए मांस का टुकड़ा रख दिया. माओ को इसकी जानकारी नहीं थी कि डॉ. राधाकृष्णन को मांसाहार नहीं पसंद है. डॉ. राधाकृष्णन ने खाना खाने के दौरान माओ को इस बात की जानकारी नहीं होने दी कि उन्होंने ऐसा करके कितनी बड़ी गलती की है.

ऐसे शुरू हुआ टीचर्स-डे मनाने का सिलसिला
भारत का राष्ट्रपति बनने पर कई छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई. इस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा, मेरे जन्मदिन को अगर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह एक गर्व करने वाली बात होगी. और ऐसा ही हुआ. इस तरह देश में 5 सितंबर को उनके जन्मदिवस के मौके को ही शिक्षक दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत हुई.

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