तिरछी नजर 👀 : सरकार बनाने की तैयारी…. ✒️✒️

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मतदान खत्म होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के रणनीतिकार सरकार बनाने की तैयारी में जुट गये हैं। दोनों ख़ेमों में जमकर उत्साह है। कांग्रेस के रणनीतिकार 50+ सीटों का आकलन कर संभावित विधायकों को एकजुट रखने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके तहत नतीजे घोषित होते ही विधायकों को सुरक्षित रायपुर लाया जाएगा। विजय जुलूस जैसे जश्न और जलसे से फिलहाल दूर रहने की सलाह दी जा रही है। कांग्रेस के चौकन्नेपन का अन्दाज़ इसी से लगाया जा सकता है कि मतदान ख़त्म होते ही रात की उड़ान से प्रदेश प्रभारी सैलजा रायपुर पहुँच गईं और तत्काल बैठकों में मशगूल हो गईं। यह सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा।
वहीं भाजपा में केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी की एक रिपोर्ट आने के बाद हलचल तेज ही गई। रिपोर्ट में पार्टी को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। बावजूद इसके कांग्रेस की भाँति यहाँ बैठकों और रणनीति बनाने का दौर शुरू नहीं हुआ है। प्रदेश के नेताओं की सारी उम्मीद केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हुई है।

एक साथ ढाई हजार
महिला कर्मी गर्भवती!!!

रायपुर की चारों सीटों पर कम मतदान की खूब चर्चा हो रही है।कई लोग इसके लिए जिला प्रशासन के प्रयासों में कमी गिना रहे हैं। यह कुछ हद तक ठीक भी है। रायपुर जिले में प्रशासन ने ईमानदारी से मेहनत की होती, तो वोटों का प्रतिशत बढ़ गया होता।धुर नक्सल प्रभावित विधानसभा कोंटा में रायपुर की चारों सीटों से अधिक मतदान हुआ है।रायपुर में तो प्रशासन ने अफसरों की चुनाव ड्यूटी में वरिष्ठता का भी ख्याल नहीं रखा, तो दूसरी तरफ करीब ढाई हजार महिला कर्मचारियों ने चुनाव ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए गर्भवती होना बताया था और बकायदा मेडिकल सर्टिफिकेट भी भेज दिया था। इसको लेकर प्रशासन पशोपेश में रहा। ऐसे में किसी तरह चुनाव निपटारा ही एकमात्र उद्देश्य रहा गया था।

बृजमोहन के लिए शुभ संकेत

रायपुर दक्षिण विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी बृजमोहन अग्रवाल के लिए चुनाव चिन्ह बाल्टी छाप शुभ प्रतीत होता है। अपना नाम पहला चुनाव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उस समय नगर सेठ माने जाने वाले स्वरूप चंद्र जैन के खिलाफ लड़ कर 23 सौ मतों से जीत हासिल की थी। इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका बाल्टी छाप से चुनाव लडऩे वाले बदरूदीन के 2 हजार वोट ने निभाई थी।
इस बार का चुनाव भी बृजमोहन के लिए चुनौती पूर्ण था इस चुनाव में भी सफलता के संकेत मिलने लगे हैं।इस बार भी बाल्टी छाप से चुनाव लडऩे वाले वासुदेव जोतवानी प्रत्याशी हैं। इन 35 सालों में बृजमोहन अग्रवाल पर सेठ होने के आरोप मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित तमाम कांग्रेसियों चुनाव के दौरान लगाए थे। सोशल मीडिया पर भी काफी कुछ कहा गया। मगर बाल्टी की वजह से बृजमोहन निश्चित हो सकते हैं।

पंडाल लगा कर पैसा बांटते रहे

चुनाव के दौरान शराब पैसा सहित अन्य सामग्री बटने का आरोप लगते रहते है। चुनाव आयोग कार्रवाई भी करता है लेकिन इस बार चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग के सख्ती के चलते अपेक्षाकृत कम शराब बांटे। शराब प्रेमी मतदाताओं को भारी निराशा हुई। लेकिन पैसा तो खूब बांटा गया। एक प्रत्याशी ने तो बकायदा पंडाल लगा कर मतदाताओं को पैसे बांटे। हरेक मतदाता को एक हजार रुपए दिए जा रहे थे। पैसा बांटने से पहले प्रत्याशी के समर्थको ने विरोधी दल के नेताओ से अनुरोध भी किया कि वो हंगामा नहीं खड़ा करे। मतदाताओं के नाराज होने के डर में विरोधी दल के लोग भी पैसा बंटते देखते रहे। मतदान पूर्व की रात्रि भर गली मोहल्लों में लाइन लगा कर पैसा मतदाता लेते रहे। ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की आशा बैमानी है। बावजूद इसके राजधानी रायपुर में बेहद कम मतदान हुआ।

घिर गए रविन्द्र चौबे..

प्रदेश के सबसे चर्चित साजा विधानसभा क्षेत्र में इस बार संघ ने चुनाव लड़ा है ।
आरएसएस कार्यकर्ताओं ने साजा विधानसभा के गांव -गांव में जाकर कर हिन्दुत्व का अलख जगाने की कोशिश की है। साहू और निर्णायक माने जाने वाले लोधी समाज को लामबंद करने की कोशिश हुई। जगदगुरू शंकराचार्य के भक्त रविन्द्र चौबे कांग्रेस की राजनीति में हिन्दुत्व का पैरोकार माने जाते हैं। क्षेत्र में सैकड़ो मठ मंदिर बनवाए हैं। देश के प्रमुख साधुसंतो को घर व विधानसभा क्षेत्र में आमंत्रित करते रहते है।इसके बावजुद हिन्दुत्व की राजनीति से इस चुनाव में घिर गए थे। हिन्दुत्व की राजनीति को आक्रोश में बदलने के लिए भाजपा ने कवर्धा के बाद साजा में जोरदार तरीके से प्रयोग किया है। इस प्रयोग से क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता खुद सहमत नहीं दिखे ।पर जनता का फैसला आना बाकी है।देखना है कौन कितना सफल होता है।

बस्तर और सरगुजा से बनेगी सरकार ?

भाजपा के लोगों का सोचना है कि इस बार सरकार बनाने में सरगुजा और बस्तर की भूमिका अहम होगी। सरगुजा में न्यूनतम 10 सीट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बस्तर में 12 में से 8 सीट मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि मैदानी इलाकों की सीटों को लेकर सशंकित हैं। क्योंकि यहां कर्जमाफी बढ़ा मुद्दा था। फिर भी
पार्टी के लोगों का मानना है कि भाजपा बहुमत के करीब पहुंच जाएगी। दावे में कितना दम है,यह तो तीन तारीख के बाद पता चलेगा।

मिल गया प्रत्याशी

क्या भाजपा को रायपुर उत्तर से अगले चुनाव के लिए मजबूत प्रत्याशी मिल गया है? सबकुछ ठीकठाक रहा तो एक निर्दलीय प्रत्याशी को आगामी दिनों में भाजपा प्रवेश कराया जा सकता है। इसके ज़रिए संत और समाज विशेष को संतुष्ट किया जाएगा और असंतुष्टों को किनारे लगाया जायेगा। बताते हैं कि इस प्रत्याशी ने जिस मज़बूती से चुनाव लड़ा और जनसमर्थन जुटाया, उससे भाजपा नेतृत्व उनमें काफी संभावना देख रहा है। एक चर्चा यह भी है कि निर्दलीय प्रत्याशी ने नतीजों की परवाह किए बग़ैर चुनाव में पूरी ताक़त झोंककर आगामी चुनाव के लिए अभी से अपनी मज़बूत दावेदारी पेश कर दी है। बहरहाल, आने वाले दिन काफ़ी उलटफेर वाले होंगे।

 

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