चुनाव हो गया, नतीजे आ गए, मुख्यमंत्री और उनके दो डिप्टी भी बन गये। नहीं बना तो पूरा मंत्रिमंडल और न ही दोनों डिप्टी को कोई विभाग मिल पाया है। बावजूद इसके बेहतर प्लेसमेंट होने से दोनों डिप्टी खुश हैं। बेचैन हैं पुराने और खाँटी नेता, जो मानकर चलते हैं कि मंत्रिपद पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। कोई दूसरा विधायक इस पर तिरछी नज़र भी नहीं डाल सकता। इन नेताओं की बेचैनी का आलम यह है कि फ़ोन की हर घंटी उन्हें शपथ का आमंत्रण सुनाई देती है। मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के पहले रात बारह बजे तक वे अफ़सरों को फ़ोन लगाकर मंत्रियों की सूची को लेकर पूछताछ करते रहे। मग़र उन्हें निराशा हाथ लगी। माहौल भाँपकर अफ़सरों ने भी पलटी मार दी। नतीजन नेताजी को खुश करने के चक्कर में चल रहा अतिक्रमण विरोधी अभियान तीन दिन में ही दम तोड़ दिया। देर रात दुकानें बंद कराने की मुहिम भी चुपचाप बंद कर दी गई। आगे और भी दिलचस्प नज़ारे देखने को मिलेंगे।
भूपेश को बड़ी ज़िम्मेदारी देने की तैयारी
कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि भूपेश बघेल को आलाकमान उत्तर भारत में बड़ी ज़िम्मेदारी देना चाहता है। लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र इसे काफ़ी अहम माना जा रहा है। वैसे अब तक राज्य गँवा चुके मुख्यमंत्रियों को आलाकमान महासचिव बनाकर दिल्ली बुलाता रहा है। आलाकमान का मानना है कि आम चुनाव में भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ समेत उत्तर भारत के राज्यों में प्रभावी चेहरा हो सकते हैं। शायद यही वजह है कि डॉ. चरणदास महंत को विधायक दल का नेता मनोनीत कर दिया गया और संगठन की कमान दीपक बैज के हाथों में बरकरार रखी गई है।
सत्र के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद मंत्रीमंडल फेरबदल को लेकर चर्चा चल रही है। मंत्रिमंडल पर नीतिगत फैसला दिल्ली से होना है। तीनों राज्यों में फैसला लोकसभा चुनाव को देखते हुए जाति समीकरण को तव्वजो मिलने के संकेत है। दिग्गज नेताओं के मंत्री नहीं बनने के संकेत मिलने के बाद ठेकेदार, अधिकारी,सप्लायरों ने भी कदम धीमा कर दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए केन्द्रीय नेतृत्व नये लोगों को मौका दे सकती है। विधानसभा सत्र के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।
—
भूपेश की टीम विष्णु की सेवा में
चुनाव आयोग अगले सप्ताह से लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटने वाला है। लोकसभा चुनाव के मतदाता सूची का पुनीरिक्षण आदेश अगले सप्ताह निकलने की संभावना है। लोकसभा के लिए दिशा निर्देश जारी होने के पहले जिलाधीश, एसडीएम व तहसीलदार जैसे पदों में पदस्थ अफसरों को हटाना होगा। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के पहले नवगठित विष्णु देव सरकार को सूची बनाने की कवायद पूरी करनी होगी। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर किसी भी पद में नियुक्ति नहीं होने के कारण अफसर भी आदेश का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की टीम के अधिकारी विष्णु देव के सारे कामकाज दौड़ दौड़ के पूरा कराने में लगे हैं्। कई अधिकारियों ने रिलिव करने का अनुरोध भी विनम्रता पूर्ण तरीके से सीएम से किया लेकिन सीएम ने फिरहाल सभी को घोषणा पत्र के अनुरूप काम करने का दिशा निर्देश दे दिया है।
—
बिल्डरों पर गुस्सा
राजधानी के पूर्व मंत्री व नवनिर्वाचित भाजपा विधायक से मिलने पिछले सप्ताह प्रदेश के बड़े बिल्डर क्रेड़ाइ अध्यक्ष के नेतृत्व में बुके लेकर मिलने उनके निवास पहुंचे। बिल्डरों को घर में देखते ही तेज तर्रार विधायक ने जोरदार घुडक़ी लगाई। पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार में आप लोगों ने अपने अनुसार मास्टर प्लान बनवाया है। थैला भर-भरके अधिकारी को पैसा देकर काम करवाए हो। पूरे मामले को फिर से देखूंगा। उस अधिकारी को तो छोड़ूंगा नहीं। बधाई देने पहुंचे बिल्डरों के चेहरे से हवाई उड़ गयी। चुपचाप सारी बातें सुनकर दबे पांव वापस लौट गये। इस घटना की बिल्डरों के बीच जमकर चर्चा है।

होलसेल कॉरीडोर खटाई मे
नवा रायपुर के निकट प्रस्तावित होलसेल कॉरीडोर खटाई में पड़ता दिख रहा है। बताते हैं कि कुछ प्रभावशाली व्यापारियों ने एकजुट होकर कांग्रेस सरकार के लोगों के साथ मिलकर कॉरीडोर का प्लान तेैयार किया था। सैकड़ों एकड़ जमीन पर प्रस्तावित कॉरीडोर के लिए लैंड यूज भी मनमाफिक चेंज करा लिया गया है। व्यापारियों ने इस एवज में चुनाव से पहले उदारतापूर्वक चंदा भी दे दिया था। यह राशि करीब 50 सीआर के आसपास रही है। अब सरकार बदल गयी तो कुछ लोगों ने नई सरकार के रणनीतिकारों के कान फूंक दिए। सरकार अब इस परियोजना के पुर्नविचार करने जा रही है। आने वाले दिनों में व्यापारियों के बीच आपसी लड़ाई सड़क पर दिख सकती है। इन सबके चलते कई खुलासे हो सकते हैं।
वन अफसरों पर गिरेगी गाज
भाजपा ने आधा दर्जन आईएफएस अफसरों की सूची तैयार की है। जिन्होंने चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाने की खूब कोशिश की थी। इसमें विभाग के शीर्ष अफसर का नाम सुर्खियों में लिया जा रहा है।
बताते हैं कि अफसर ने कवर्धा में काफी मेहनत की थी। वन अमले ने साधन संसाधन निचले स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई लेकिन इसका कोई फायदा नहीं मिला। अपेक्षाकृत नतीजे नहीं आए। जिन्हें हराने की कोशिश में थे वो सरकार का हिस्सा बन चुके हैं। अब बारी अफसरों की है।
हालांकि अफसरों ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली है उन्होंने कुछ ताकतवर नेताओं पर दांव लगाया था जो जीतकर आ चुके हैं। अब देखना यह है कि ताकतवर नेता ,अफसरों को नुकसान से कितना बचा पाते हैं ।
—
वजनदार रहेंगे चौधरी
रायगढ़ से रिकार्ड वोटों से जीतकर आए पूर्व आईएएस ओ.पी.चौधरी को केबिनेट में शामिल होने का भरोसा था। मगर चौधरी को जगह नहीं मिल पायी है बल्कि पार्टी संगठन में उनके समकक्ष विजय शर्मा को डिप्टी सीएम का पद मिल गया।
बताते हैं कि चौधरी निराश थे और शपथ ग्रहण के बाद साईंस कालेज मैदान से सीधे घर चले गये। बाद में पार्टी संगठन के प्रमुख नेता उनके घर पहुंचकर चर्चा की है । कहा जा रहा है कि चौधरी डिप्टी सीएम भले ही न बन पाए हों लेकिन मंत्री जरूर रहेंगे और अहम विभाग उनके हिस्से में रहेगा। देखना है मंत्रीमंडल का विस्तार कब तक होता है।
—

