CG HIGH COURT DECISION : Order to remove Municipal Council President cancelled
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। सारंगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष सोनी अजय बंजारे को पद से हटाने और पांच साल के लिए अयोग्य घोषित करने के सरकार के फैसले को डिवीजन बेंच ने रद्द कर दिया है। साथ ही सिंगल बेंच का फैसला भी निरस्त कर दिया गया।
डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41-ए के तहत किसी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए अध्यक्ष को हटाने की कार्रवाई तभी सही मानी जा सकती है, जब व्यक्तिगत दोष स्पष्ट रूप से साबित हो। सिर्फ सामूहिक निर्णयों के आधार पर कड़ी सजा देना कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सख्ती से पालन अनिवार्य है।
दरअसल, सोनी अजय बंजारे 3 जनवरी 2022 से सारंगढ़ नगर परिषद की अध्यक्ष थीं। उनके कार्यकाल के दौरान नगर परिषद की जमीन कुछ लोगों को दुकानों के निर्माण या विस्तार के लिए पट्टे पर दी गई थी। आरोप लगा कि राज्य सरकार की स्वीकृति और तय वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए बिना कब्जा दे दिया गया।
इसी मामले में 12 मार्च 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और 2 जुलाई 2025 को राज्य सरकार ने उन्हें पद से हटाते हुए अगले कार्यकाल के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया। बंजारे ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला डिवीजन बेंच पहुंचा।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि जांच रिपोर्ट में मुख्य नगर अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी बताई गई थी, लेकिन कार्रवाई केवल अध्यक्ष पर की गई। समान परिस्थितियों में दूसरों पर कार्रवाई न करना भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की मेरिट पर कोई राय नहीं दी है। राज्य सरकार चाहे तो दो सप्ताह के भीतर नए सिरे से कार्रवाई कर सकती है, लेकिन इस बार कानून और प्राकृतिक न्याय के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना होगा।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और स्थानीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।

