संवाददाता: नीरज शर्मा ( शिवरीनारायण ✍️)
शिवरीनारायण। धार्मिक आस्था की पावन भूमि शिवरीनारायण आज एक ऐसी स्थिति का सामना कर रही है, जहाँ भगवान श्रीराम के वनपथगमन मार्ग का निर्माण कार्य वर्षों से ठप पड़ा है। कछुए की चाल से चल रहे इस प्रोजेक्ट ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहराई से आहत किया है।
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु जब अधूरे, बिखरे और अव्यवस्थित कार्य को देखते हैं तो निराश होकर लौटते हैं। एक धार्मिक नगरी की यह दशा प्रशासन की उदासीनता और गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
खराब होती सामग्री और जनता की मुश्किलें
सड़क किनारे महीनों से यूं ही पड़ी निर्माण सामग्री अब खराब होने लगी है। ठंड की सीलन ने सीमेंट की बोरियों को बेकार कर दिया है, लोहे–मशीनों पर जंग चढ़ रहा है, और मार्ग पर बिखरा सामान रोज़मर्रा के आवागमन में बाधा बन चुका है।
लाखों–करोड़ों की अनियमितताओं पर सवाल
स्थानीय लोगों ने कई बार सवाल उठाए हैं कि इस निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएँ हुई हैं।भगवान श्रीराम की मूर्ति जिसे 40 फीट ऊँचा होना था, उतनी ऊँची बनी ही नहीं।
मौजूदा मूर्ति दूर से स्पष्ट दिखाई तक नहीं देती, जबकि बजट में इसके लिए भारी राशि दर्ज है। कई स्थानों पर केवल मिट्टी भराव, छोटे-मोटे पैचवर्क और सामान्य निर्माण के नाम पर भी अत्यधिक बिल दिखाए गए हैं, जो सोचने पर मजबूर करते हैं।
रामवनपथ थीम पर बने ठेला-गुमटियाँ भी बर्बादी की कगार पर
इस अधूरे निर्माण का गंभीर असर उन स्थानीय दुकानों पर भी पड़ा है जो नदी किनारे रामवनपथगमन थीम पर तैयार की गई थीं।
कई ठेला–गुमटियाँ, जो यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई गई थीं, काम रुकने के कारण सालों से बंद पड़ी हैं।
लंबे समय तक उपयोग न होने से ये गुमटियाँ अब नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे स्थानीय दुकानदार कोई इसका लाभ नहीं मिल पाया हैं।
जनता की नाराज़गी अब रोष में बदल रही
नगरवासियों का कहना है कि यह सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था और भावना का मार्ग है। इतने महत्वपूर्ण धार्मिक प्रोजेक्ट को इस स्थिति में छोड़ना शिवरीनारायण की पहचान और आध्यात्मिक सम्मान—दोनों के साथ अन्याय है।
नगरवासियों की मांग
लोगों ने सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप, निर्माण कार्य की जांच तथा इसे समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराने की सख्त मांग की है, ताकि शिवरीनारायण की गरिमा और धार्मिक महत्व पुनः स्थापित हो सके।

