RAIPUR COURT : Commissionerate Court inaugurated in Raipur
रायपुर। राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के तहत सोमवार से प्रतिबंधात्मक धाराओं की सुनवाई शुरू हो गई। अब तक जिन मामलों में एडीएम या एसडीएम कोर्ट में चालान पेश किया जाता था, उन पर सुनवाई और फैसला अब कमिश्नरेट के अधिकारी खुद दंडाधिकारी शक्तियों के तहत कर रहे हैं।
पहले ही दिन रायपुर के कोतवाली और सिविल लाइन सब-डिवीजन के एसीपी ने कार्रवाई करते हुए कई मामलों में नोटिस, समन और जेल वारंट जारी किए।
काले कोट में दिखे एसीपी
सोमवार को फील्ड में खाकी वर्दी में नजर आने वाले अधिकारी दंडाधिकारी की भूमिका में काले कोट पहनकर अस्थायी कोर्ट में बैठे। थाना परिसर में बनाए गए अस्थायी कोर्ट रूम में सुनवाई हुई।
प्रतिबंधात्मक धाराओं के मामलों में अभियोजन पक्ष को वकील की जरूरत नहीं होती, जबकि अनावेदक पक्ष की ओर से अधिवक्ता मौजूद रहे।
किन धाराओं में कार्रवाई
कोतवाली एसीपी दीपक मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170, 126 और 135(3) के तहत एक मामले में दो आरोपियों के खिलाफ जेल वारंट जारी किया। इसके अलावा अलग-अलग पांच प्रकरणों में 13 लोगों को कारण बताओ नोटिस और समन जारी किए गए।
वहीं सिविल लाइन एसीपी रमाकांत साहू ने लोक शांति भंग होने की आशंका के तहत छह लोगों को धारा 126 और 135(3) में नोटिस जारी किए।
‘नई भूमिका चुनौतीपूर्ण’
एसीपी दीपक मिश्रा ने कहा कि पहले आरोपियों को जेल भेजने के लिए एडीएम या एसडीएम कोर्ट जाना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं मजिस्ट्रेट की भूमिका में निर्णय लेना जिम्मेदारी भरा काम है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के साथ न्याय सुनिश्चित करते हुए कानून के दायरे में फैसला सुनाया गया।
कमिश्नरेट का ‘एक्शन मोड’
राजधानी में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद दंडाधिकारी शक्तियों का यह पहला बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। इसे कानून-व्यवस्था को सख्ती से नियंत्रित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

