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राष्ट्रपति और उनके लिए शैक्षणिक योग्यता

राष्ट्रपति और उनके लिए शैक्षणिक योग्यता
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दुनियां के किसी भी देश मे राष्ट्रपति-के चयन के लिए शिक्षा की अनिवार्यता नहीं है(जितना मैंने खोजने पर पाया)। ये भी माना जाता है कि स्कूल कालेज की शिक्षा से शैक्षणिक योग्यता भले ही मिल जाती है लेकिन व्यावहारिक शिक्षा का ज्ञान समझ पर निर्भर करती है। विवेक, तर्क,और गुण दोष के आधार पर निर्णय करने की क्षमता के साथ साथ अन्य विद्धवान लोगो में सलाह मशविरा करने की उपलब्धता ने शायद डिग्री वाली शिक्षा की अनिवार्यता को दुनियां में कभी स्थापित होने नही दिया है। इसके बावजूद भारत के 13 राष्ट्रपति में ज्ञानी जैल सिंह को छोड़कर शेष सभी राष्ट्रपति स्कूली शिक्षा से लेकर देश विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त किये हुए रहे है। सबसे ज्यादा डिग्री डॉ शंकर दयाल शर्मा के पास थी। उन्होंने संस्कृत,हिंदी, और अंग्रेजी में एम.ए के अलावा कानून की परीक्षा में एल एल एम की डिग्री प्राप्त किये थे।
ऐसा माना जाता हैं कि राष्ट्रपति के समक्ष संवैधानिक संकट के दौर में कानूनी अड़चने आती है ऐसे में कानून की शिक्षा मददगार होती है। देश के 13 राष्ट्रपति में से 6 राष्ट्रपति कानून के शैक्षणिक योग्यता हासिल किए हुए थे। शंकर दयाल शर्मा और डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने एल एल एम(पोस्ट ग्रेजुएट) करने के बाद केम्ब्रिज से पी एच डी किया था ।फकरुद्दीन अली अहमद केम्ब्रिज से और प्रतिभा पाटिल, प्रणव मुखर्जी और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एल एल बी किया हुआ है। जाकिर हुसैन, अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद पी एच डी किया था। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन दर्शन शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट थे। के आर नारायण इंग्लिश में पोस्ट ग्रेजुएट थे। देश के सभी राष्ट्रपतियो में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले इकलौते राष्ट्रपति मिसाइल मैन ए पी जे कलाम थे जिन्होंने भौतिक शास्त्र में बी एस सी किया था। उन्हें 40 देशों ने डी लिट् की उपाधि देकर सम्मानित किया था। देश को परमाणु शक्ति देने में कलाम की भूमिका महत्वपूर्ण थी। देश के2 राष्ट्रपति व्ही वही गिरी, और नीलम संजीव रेड्डी ने स्कूल शिक्षा से आगे नही पढ़ पाए वही ज्ञानी जैल सिंह स्कूल भी नही गए थे लेकिन देश के प्रथम नागरिक बने।

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