MAGH MELA CONTROVERSY : No one is above the law – Chief Minister Yogi
लखनऊ/प्रयागराज। 18 जनवरी को प्रयागराज माघ मेले में हुए शंकराचार्य-पुलिस विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार विधानसभा में खुलकर बयान दिया। उन्होंने साफ कहा “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, मैं भी नहीं।”
सीएम ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन करीब साढ़े 4 करोड़ श्रद्धालु मेले में पहुंचे थे। ऐसे में प्रशासन ने सबके लिए समान व्यवस्था बनाई थी। “मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है,” योगी ने दोहराया।
‘मुद्दा बनाया गया’
योगी ने आरोप लगाया कि जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर बड़ा बनाया गया। उन्होंने व्यवस्था और परंपरा का हवाला देते हुए कहा “क्या हर कोई मुख्यमंत्री बनकर घूम सकता है? सिस्टम सबके लिए है।”
सपा पर पलटवार
सीएम ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूछा “अगर वे शंकराचार्य थे तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों हुआ? एफआईआर क्यों दर्ज हुई?” उन्होंने कहा कि मर्यादाओं का पालन सभी को करना होगा।
कालनेमि बयान से बढ़ा विवाद
22 जनवरी को हरियाणा में दिए बयान में योगी ने ‘कालनेमि’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जोड़कर देखा गया। इसके बाद शंकराचार्य ने योगी पर तीखा हमला बोला और उन्हें “नकली हिंदू” तक कह दिया।
18 जनवरी को क्या हुआ था?
मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। पालकी संगम से करीब एक किमी दूर रोक दी गई और वे स्नान नहीं कर सके। बाद में वे 28 जनवरी तक शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे।
सरकार का कहना है कि भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कदम उठाए गए। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने अब धार्मिक मंच से लेकर विधानसभा तक सियासी घमासान खड़ा कर दिया है।

