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जो लोग अपना खाना खुद बनाते हैं, वो ज्‍यादा स्‍वस्‍थ होते हैं : स्‍टडी

अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जरनल में तीन साल पहले एक स्‍टडी प्रकाशित हुई, जिसमें अमेरिका के 800 परिवारों के फूड रूटीन का अध्‍ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग अपना खाना खुद बनाते हैं और जिनका 80 फीसदी से ज्‍यादा मील होम कुक्‍ड यानि घर का बना हुआ होता है, वो उन लोगों के मुकाबले ज्‍यादा स्‍वस्‍थ और कम बीमारियों के ग्रस्‍त होते हैं, जो लोग बाहर रेस्‍टोरेंट में खाना खाते हैं या किसी भी रूप में बाहर से बनकर आ रहे खाने का सेवन करते हैं.

अब एक और स्‍टडी इस दावे की पुष्टि कर रही है. यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन, स्‍कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ की यह नई स्‍टडी भी सामान्‍य शब्‍दों में इसी बात को दोहरा रही है. जो लोग अपना खाना खुद बनाते हैं, वो उन लोगों के मुकाबले ज्‍यादा स्‍वस्‍थ होते हैं, जो बाहर रेस्‍त्रां से बना खाना ऑर्डर कर रहे हैं.

डॉ. मार्क हाइम इस स्‍टडी को शेयर करते हुए लिखते हैं कि आदर्श स्थिति तो यह है कि आप ज्‍यादातर फल, सब्जियों और अनप्रॉसेस्‍ड फूड का ही इस्‍तेमाल करें. लेकिन यकीन करें कि अगर आपके भोजन का 70 फीसदी हिस्‍सा फल और सब्जियां नहीं भी हैं, तो भी यदि आप अपना खाना खुद बना रहे हैं (मुमकिन है कि अधिकांश समय वो पास्‍ता, सीरियल जैसी चीजें हों) तो भी आपका स्‍वास्‍थ्‍य बाहर का खाना खा रहे लोगों के मुकाबले बेहतर होगा.

डॉ. हाइम इसकी वजह भी बताते हैं. वो कहते हैं कि नमक हो या चीनी, जो हम घर में इस्‍तेमाल कर रहे होते हैं, वो उतनी खतरनाक नहीं है, जितनी कि वो जो रेस्‍त्रां के प्रॉसेस्‍ड फूड में मिलाई जा रही है. डॉ. हाइम के मुताबिक बाहर के रेडीमेड खाने और रेस्‍त्रां के खाने में ऐसे एडिक्टिव केमिकल्‍स का इस्‍तेमाल होता है, जो इंसानी शरीर के लिए खतरनाक हैं. हमारी आंतें उसको पचाने में सक्षम नहीं है. वो खाना हमारे शरीर में जाकर टॉक्सिन पैदा करता है, आंतों में चिपकता है और बीमारियों को जन्‍म देता है.

नॉर्वे की एक और स्‍टडी भी यही कहती है कि घर का बना खाना हमें ज्‍यादा स्‍वस्‍थ रखता है. यह अनायास नहीं है‍ कि इतने सारे अध्‍ययन एक ही तरह की बात कह रहे हैं. आखिरकार हमारी मां, दादियां-नानियां भी जिंदगी भर यही कहती थीं कि घर का खाना खाया करो. बाहर की चीजें नुकसान करती हैं.

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