ईडी के डर से ‘लापता’ हो रहे लोग

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रायपुर। शराब घोटाले में फंसे लोग अब ईडी की गिरफ्तारी के डर से ‘लापता’ होने लगे हैं। यह सिलसिला पिछले कई हफ्तों से चल रहा है और इनमें सबसे ज्यादा संख्या सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की है।

राजधानी से प्रकाशित होने वाले एक दैनिक अखबार के शुक्रवार के अंक में शराब कारोबारी अरविंद सिंह के लापता होने का विज्ञापन उनके भाई ने छपाया है। विज्ञापन के मुताबिक अरविंद सिंह अवंति विहार कॉलोनी के किसी अपार्टमेंट में रहते हैं। अपार्टमेंट के गार्ड को एक पत्र सौंपकर कहीं चले गए हैं। विज्ञापन के मुताबिक उनकी मां ब्रेन हेमरेज के कारण पिछले 10 दिनों से अस्पताल में इलाज करवा रहीं हैं। जाहिर है अरविंद सिंह को लापता हुए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं। जानकारों के मुताबिक यह विज्ञापन कानूनी, तकनीकी और भावनात्मक रूप से अरविंद का पक्ष मजबूत करने के मकसद से प्रकाशित किया गया है। मालूम हो कि अरविंद सिंह के घर पर पिछले दिनों ईडी ने छापा मारा था। उन्हें पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर भी बुलाया गया था। जांच के घेरे में आए कई लोगों की तरह अरविंद सिंह ने भी गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उस पर सुनवाई नहीं हो पाई है और 22 मई से सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक जिला स्तर पर शराब कारोबार से सीधे तौर पर जुड़े करीब 30 से 40 फीसद अधिकारी और कर्मचारी लापता हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों को ईडी की कार्रवाई शुरू होने के बाद से दफ्तरों में नहीं देखा गया है। कुछ अधिकारी और कर्मचारी खुद को अस्पताल में भर्ती होना बता रहे हैं। एक साथ बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों का बीमार होना भी कई संदेहों को जन्म देता है। जानकारों का कहना है कुछ महीने बाद मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर यह अधिकारी और कर्मचारी वापस लौट आएंगे। बहरहाल, मौजूदा परिदृश्य में यही लगता है कि ईडी की कार्रवाई ने शराब के धंधे से जुड़े लोगों को दहशत में डाल दिया है।

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