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पुराने डीलर ने किया गुमराह..व्यापारियों को किया ब्लैकमेल..पुलिस जांच में सच आया सामने..सभी आरोप गलत..संचालकों ने की कार्रवाई की मांग

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बिलासपुर—वलराज पेट्रोल पम्प विवाद मामले का सारा सच पुलिस जांच में सामने आ गया है। पुराने डीलर की शिकायत पर पुलिस ने जांच पड़ताल के दौरान पाया कि वलराज पेट्रोल पम्प का हस्तांतरण विधि सम्मत हुआ है। सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।  मोहम्मद तारीक की शिकायत में किसी प्रकार की सच्चाई नहीं है। बहरहाल वलराज पेट्रोल पम्प के वर्तमान संचालकों में आक्रोश है कि कई एजेंसियों ने जांच को अंजाम दिया है। सच्चाई भी समाने आ चुकी है। लेकिन  मोहम्मद तारीख मीडिया को गलत जानकारी दे रहा है। ना केवल  ब्लैकमेलिंग कर रहा है। बल्कि  मानसिक रूप से प्रताडित करने से बाज नहीं आ रहा है। हमारे पास अब मात्र एक ही रास्ता है। सामाजिक आर्थिक और मानसिक परेशानी देने वाले के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे। पुलिस प्रशासन से अपराध दर्ज किए जाने की मांग करेंगे।

जानकारी देते चलें कि पिछले कुछ महीनों से वलराज पेट्रोल पम्प मामला काफी चर्चा में रहा। मामले में पुराने संचालकों में से एक मोहम्मद तारीक ने वर्तमान पम्प मालिकों पर आरोप लगाया कि पेट्रोल पम्प और जमीन को फर्जी तरीके से हासिल किया है। मामले को लेकर तारीक ने पुलिस प्रशासन से लिखित शिकायत कर जांच की मांग किया था।
                      पुलिस जांच में वलराज पेट्रोल पम्प का हस्तांतरण  विधि सम्मत पाया गया है।  हासिल दस्तावेज के अनुसार हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, पुराने डीलर और वर्तमान डीलर के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से हस्तांतरण प्रक्रिया में भाग लिया। वर्तमान में पेट्रोल पम्प देवीदास वाधवानी समेत अन्य संचालकों के पास है। मोहम्मद तारीक की शिकायत में किसी प्रकार की सच्चाई नहीं है। तारीक ने फर्जी दस्तावेज पेश कर गुमराह किया है।
सहमति से हुआ फैसला
                   मामले में देवीदास वाधवानी ने बताया कि लिखा पढ़ी के पहले बलराज पेट्रोल पम्प का संचालन मोहम्मद तारीक समेत अन्य दो भागीदार खालिदा अफाक, मोहम्मद आरिफ के हाथ में था। जमीन पूर्व मंत्री अशोक राव की पत्नी कस्तूरी राव की थी। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ 2011 में लीज खत्म होने के बाद उन्होने दुबारा लीज करने से इंकार किया। बाद में जमीन को कस्तूरी राव ने बेच दिया। जबकि पैट्रोल पम्प की आधारभूत संरचना का निर्माण हिन्दुस्तान पेट्रोलियमम ने ही किया है।
              देवीदास,कैलाश और राम के अनुसार वलराज पेट्रोल पम्प के पुराने तीनो भागीदारो ने 24 अप्रैल 2019 ने लिखित में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम को बताया कि डीलरशिप छोड़ना चाहते हैं। करीब 9 महीने बाद रीजनल अधिकारी सारी प्रक्रिया के बाद पुराने डीलरशिप को खत्म किया। इसी के साथ तारीक का पेट्रोल पम्प से मालिकाना भी खत्म हुआ।
सभी  एजेंसियों ने बताया फर्जी
                  मोहम्मद तारीक ने मामले को उच्च न्यायलय में भी लगाया। बाद में  शिकायतों को वापस भी लिया। बावजूद इसके उसने प्रधानमंत्री कार्यालय, खाद्य विभाग, नाप तौल विभाग, पुलिस अधीक्षक समेत कई जगह झूठी शिकायत किया। इस दौरान उसने फर्जी कागजात पेश करने के अलावा अनर्गल बयानबाजी कर मान सम्मान पर हमला किया। जगह जगह की गयी शिकायतों को सभी एजेंसियों ने जांच पड़ताल के बाद गलत करार दिया।
सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंची चोट
                वलराज पेट्रोल पम्प संचालकों ने बताया कि मोहम्मद तारिक ने हमारी समाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाया है। विभिन्न माध्यमों से अनाप शनाप बातों को छपवाकर छवि को धूमिल किया है। ऐसा कोई मौका नहीं जाने दिया कि जिससे उनकी बदनामी हो। उसने मीडिया के सामने अंसदीय भाषा का भी प्रयोग किया। और  मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया है। गालियां भी दी है।
             वलराज पेट्रोल पम्प संचालकों के अनुसार पुलिस जांच में तारीक की शिकायत को असत्य पाया गया है। फर्जी दस्तावेज पेश कर कानून और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया है। इसके पहले खाध विभाग ने भी शिकायतों को गलता पाया था। सेन्ट्रल जीएसटी ने भी तारीक की शिकायत और पेश किए गए दस्तावेजो को फर्जी करार दिया है।
पांच साल तक किया गुमराह
                      सच्चाई तो यह है कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी तारीक ने 5 साल तक  अवैधानिक रूप से पेट्रोल पम्प का संचालन किया। मिडिया को अपना ही निस्त लाइसेंस वर्तमान का बताकर गुमराह किया है। और झूठा आरोप लगाकर मान सम्मान को ठेस पहुंचाया। जबकि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम से अनुमति और लायसेंस मिलने के बाद ही हमने पेट्रोल पम्प का संचालन शुरू किया है।
मानिहानि का प्रकरण
              देवीदास ने बताया कि मोहम्द तारीक की ब्लैकमेलिंग से हम परेशान हो चुके हैं।अब हमारे सामने सिर्फ कोर्ट का ही रास्ता बचा है। मानहानि का प्रकरण दायर करेंगे। साथ ही पुलिस कप्तान से शिकायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे। फिर भी जरूरत पड़ी तो अन्य कानूनी कार्रवाई पर भी विचार करेंगे।

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