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स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्कूलों में सफाई और मध्यान्ह भोजन प्रभावित

रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. अपनी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के मध्याह्न भोजन बनाने वाले कर्मचारियों का प्रदर्शन रायपुर के बूढ़ातालाब स्थित प्रदर्शन स्थल में जारी है. प्रदर्शन में शामिल होने प्रदेशभर से पहुंचे कर्मचारियों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई. कर्मचारी सड़क पर ही खाना बनाते नजर आए तो वहीं महिलाएं खुले आसमान के नीचे सड़क पर ही अपनी नींद पूरा किए.

प्रदेश के स्कूलों में रसोईया संघ ने सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल पर है। रसोइयों के हड़ताल पर जाने से स्कूलों में सफाई और मध्यान्ह भोजन प्रभावित हो रहा। हड़ताल का असर यह रहा कि शिक्षक दिवस पर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को ही मध्यान्ह भोजन बनाकर बच्चों को परोसना पड़ा। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए रसोइयों की नियुक्ति की है, लेकिन 2009 से अब तक सरकार से मिलने वाले मानदेय राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई है।

उन्हें मानदेय के रूप में केंद्र से हजार और राज्य से 500 रुपए मिलता है। इतने में परिवार का भरण पोषण नहीं हो सकता। महंगाई के दौर में इतने कम रुपए में परिवार का भरण पोषण और जीवन यापन कर पाना संभव नहीं है। रसोइया संघ का न्यूनतम मजदूरी प्रतिमाह 18 हजार देने की मांग की गई है। जिले में कुल 972 प्राथमिक शाला व 422 माध्यमिक शाला हैं। जहां प्राथमिक में 43 हजार 632 व माध्यमिक में 25 हजार 581 बच्चे पढ़ते हैं। यानी कुल 69 हजार 213 बच्चे मध्यान्ह भोजन से जुड़े हुए हैं।

रसोइयों के हड़ताल पर चले जाने से स्कूलों में मिड-डे-मील प्रभावित रहा। मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों की हड़ताल के चलते स्कूलों में मध्याह भोजन बनाने का काम शिक्षकों को संभालना पड़ा। इधर संघ के पदाधिकारी स्कूलों का चक्कर लगाते रहे और जहां भी रसोइया खाना बनाते मिलते उन्हें पकड़कर वापस ले आते। रसोइयों की हड़ताल से कई स्कूलों में मध्यांह भोजन बंद भी करना पड़ा।

रसाेइया रखने पर जेब से देनें पड़ेंगे रुपए: शिक्षक
रसाइयों के हड़ताल पर चले जाने से मीट डे मील प्रभावित हो रहा है। एेसे में शिक्षकों ने कहा कि यदि वह किसी को खाना बनाने के लिए रख भी लें और उसका भुगतान नहीं हुआ तो उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना पड़ेगा। ऐसे में शिक्षकों ने खुद ही मध्यान्ह भोजन बनाने की जिम्मेदारी संभाल ली। दूसरी ओर शाला की साफ सफाई के लिए भी जिले में अंशकालीन कर्मचारी के रूप नियुक्त करने की तैयारी चल रही है। वे सिर्फ सफाई का ही काम करेंगे।

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