Masaan ki Holi: A unique confluence of ashes, faith and celebration at Manikarnika Ghat in Kashi
काशी। आज धर्मनगरी काशी में आस्था, रहस्य और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ मणिकर्णिका घाट पर परंपरागत मसान की होली धूमधाम से खेली गई। जलती चिताओं, गूंजते डमरुओं और “हर हर महादेव” के जयघोष के बीच नागा साधु-संन्यासी चिता की भस्म से होली खेलते नजर आए।
घाट पर एक ओर जहां अंतिम संस्कार की चिताएं जल रही थीं, वहीं दूसरी ओर साधु-संन्यासी और श्रद्धालु भस्म, रंग, गुलाल और अबीर में सराबोर होकर उत्सव मना रहे थे। कोई गले में नरमुंडों की माला डाले दिखा तो कोई डमरू की थाप पर नृत्य करता नजर आया। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचे।
डमरू वादन से हुआ रंगोत्सव का शुभारंभ
मसान की होली का रंगोत्सव डमरू वादन के साथ प्रारंभ हुआ। साधु-संन्यासियों ने घाट पर पहुंचकर पूजन किया और बाबा मसान नाथ को भस्म, रंग, गुलाल और अबीर अर्पित किए। इसके बाद चिता की राख से होली खेलने की परंपरा निभाई गई।
घाट पर उत्सव के बीच से लगातार शवयात्राएं भी गुजरती रहीं, जिससे जीवन और मृत्यु का अद्वितीय संगम स्पष्ट दिखाई दिया। आमतौर पर जिस चिता की राख से लोग दूरी बनाते हैं, उसी भस्म में लोग श्रद्धा और आस्था के साथ लीन नजर आए।

3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति
बताया जा रहा है कि मसान की होली में शामिल होने के लिए तीन लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचे। विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बने और भस्म व रंगों में सराबोर होकर उत्सव का आनंद लेते दिखे।
काशी की मसान की होली एक बार फिर यह संदेश देती है कि यहां मृत्यु भी उत्सव का रूप ले लेती है और जीवन-मरण के दर्शन एक साथ साकार हो उठते हैं।

