गरियाबंद – मादा हाथी की मौत, 5 लोगों की कुचलकर ली थी जान

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गरियाबंद – धमतरी जिले में 5 लोगों को कुचलकर मारने वाले मादा हाथी की मौत गरियाबंद जिले में हो गई है। हाथी अपने झुंड से बिछड़ने के चलते काफी आक्रामक हो चुकी थी। बता दें कि गरियाबंद जिले में हाथी की मौत की यह तीसरी घटना है।

धमतरी जिले से विचरण करते आये मादा हाथी का विचरण गरियाबन्द वनमण्डल के धवलपुर परिक्षेत्र के पंडरीपानी में था।हाथी के विचरण की निगरानी हाथी मित्र एवं वनकर्मियों द्वारा किया जा रहा था। लगभग दोपहर 12:30 बजे मादा हाथी सिकासेर डुबान क्षेत्र के झाड़ियों में बैठे हालत में हाथी मित्रों द्वारा देखा गया। जिसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया। सूचना पर उप वनमंडलाधिकारी गरियाबन्द एवं पशु चिकित्सको के साथ मौके पर पहुँचने एवं निरीक्षण पर 01 नग मादा हाथी उम्र लगभग 35 वर्ष मृत अवस्था में पाया गया। जिसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया।

सूचना पर पशु चिकित्सक डॉक्टर राकेश वर्मा, डॉक्टर पंचभाई एवं डॉक्टर जोशी घटना स्थल पहुचंकर मृत हथिनी का परीक्षण किया गया। प्राथमिक परीक्षण में हथिनी की मृत्यु ACUTE INFLAMATION OF BUCCAL CAVITY एवं मूत्राशय एरिया में अत्यधिक संक्रमण होना पाया है। शव परीक्षण के दौरान मुख्य वनसंरक्षक (वन्य प्राणी ) पैकरा सर, वन मंडलाधिकारी गरियाबन्द मयंक अग्रवाल उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उप संचालक श्री वरुण जैन, पशु चिकित्सक गण, उपवनमण्डल अधिकारी मनोज चन्द्राकर, राजेन्द्र सोरी, सहायक संचालक उदंती एस एस नाविक, परिक्षेत्र अधिकारी गण, वन कर्मी एवं हाथी मित्र दल सदस्य मौजूद थे।

सिकासेर बांध के पास झाड़ियों में बीमार हाथी के बैठे होने सूचना वन विभाग की टीम को मिली थी जिसके बाद डॉक्टरों की टीक वहां पहुंची, वहीं जांच में मौत की पुष्टि हुई। हाथी का पोस्टमार्टम कल सुबह तीन डॉक्टरों की टीम और वरिष्ठ वन अधिकारियों की निगरानी में होगा मगर प्रारंभिक जांच में हाथी को इंफेक्शन तथा छाले होने की बात सामने आई है।

आपको बता दें कि 9 दिन पूर्व इस हाथी ने धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र में महज 2 दिन के भीतर पांच लोगों को पटक कर और कुचल कर मार दिया था जिसके बाद से हाथी सोधुर नदी पार कर गरियाबंद जिले में पहुंच गया था यहां उसने फायर वाचर के लिए बनाई गई एक झोपड़ी को तोड़ दिया वही महुआ बिन रही कुछ महिलाएं इस हाथी को देख कर जान बचाकर भागी थी। जिसके बाद हाथी सिकासेर बांध की ओर निकल गया था वन अधिकारियों का कहना है की यह हाथी बांध से आगे आमा मोरा की पहाड़ियों की ओर चला गया था, जिसके बाद आज वापस पीछे लौट आया और बांध के पास बैठे हुए अवस्था में बीमार होने और कुछ ना खाने की सूचना मिली। वहीं जाकर जांच की तो मौत की पुष्टि हुई।आपको बता दें कि इसके पूर्व धवलपुर वन परिक्षेत्र में करंट लगने से एक हाथी की मौत हुई थी वही आमा मोरा की पहाड़ी में एक हाथी के सावक को बाघ द्वारा मारने की बात भी सामने आई थी जिले में हाथी की मौत की यह तीसरी घटना है।

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