HIGH COURT ORDER : EMRS भर्ती में अतिथि शिक्षकों को वेटेज …

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HIGH COURT ORDER : Weightage to guest teachers in EMRS recruitment…

बिलासपुर। अतिथि शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने साफ कहा है कि वर्षों तक ईमानदारी से दी गई सेवाओं को भर्ती प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जस्टिस ए.के. प्रसाद ने आदेश दिया कि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) में नियमित भर्ती के दौरान लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के अनुभव को समुचित महत्व (वेटेज/अंक) दिया जाए।

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ के 43 अतिथि शिक्षकों जिनमें सरोज कुमार गुप्ता, अनूपा तिर्की, देवेंद्र कुमार, थानेंद्र कुमार और श्वेता राठौर सहित अन्य शामिल हैं ने अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की थीं। सभी याचिकाओं में मांग समान होने के कारण हाईकोर्ट ने उन्हें मर्ज कर एक साथ सुनवाई की।

याचिकाकर्ता 2016 से 2024 के बीच विभिन्न एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) में PGT/TGT के रूप में नियुक्त रहे हैं। उनकी सेवाएं समय-समय पर बढ़ाई जाती रहीं और कई ने 4 से 6 साल से अधिक की निर्बाध सेवा दी है।

विवाद किस बात पर?

मामला तब शुरू हुआ जब नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) ने देशभर में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों के लिए केंद्रीकृत भर्ती विज्ञापन जारी किया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि EMRS दिशा-निर्देशों के अनुसार भर्ती का अधिकार राज्य स्तरीय समिति के पास है और बिना उनकी सेवाओं पर विचार किए केंद्रीकृत भर्ती करना मनमाना है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का भी हवाला दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने माना कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति अस्थायी थी और उन्हें नियमितीकरण का सीधा कानूनी अधिकार नहीं है। साथ ही, यह भी स्वीकार किया कि EMRS को केंद्रीय योजना घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार को NESTS के माध्यम से भर्ती कराने का अधिकार है।

लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि –

“वर्षों की सेवा और अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा।”

अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार/NESTS को निर्देश दिया कि नियमित भर्ती प्रक्रिया के दौरान पात्र अतिथि शिक्षकों के अनुभव को उचित वरीयता और अंक दिए जाएं। हालांकि, कोर्ट ने स्वतः नियमितीकरण या सीधे समायोजन का आदेश नहीं दिया।

क्या होगा असर?

इस फैसले से अतिथि शिक्षकों को सीधी नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन उनकी वर्षों की सेवा को मान्यता देने का रास्ता खुल गया है। अब भर्ती प्रक्रिया में उनके अनुभव को अंक के रूप में जोड़ा जा सकता है, जिससे उन्हें प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है।

यह फैसला छत्तीसगढ़ के EMRS में कार्यरत सैकड़ों अतिथि शिक्षकों के लिए अहम माना जा रहा है।

 

 

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