रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अमित साहू ने कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के संसद घेराव को लेकर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा है कि अपने ही सहयोगी संगठन के आंदोलन में भी प्रदेश के कांग्रेस और एनएसयूआई के नेता गुटबंदी की मानसिकता से उबर नहीं पाए। श्री साहू ने कहा कि इस घेराव में शामिल होने को लेकर देशभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कांग्रेसियों को भी उसमें आमंत्रित किया गया था लेकिन उनमें से कुछ ही उसमें भाग लेने गए जबकि आधे इसलिए नहीं गए क्योंकि एनएसयूआई के जिस राष्ट्रीय नेता के नेतृत्व में संसद का घेराव होने जा रहा था, उस नेता के नाम से भी छत्तीसगढ़ में कई गुट बन गए हैं।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री साहू ने कहा कि अपने ही छात्र संगठन एन.एस.यू.आई. के आंदोलन-प्रदर्शन के प्रति कांग्रेस की उदासीनता सहयोगी संगठनों के प्रति वैचारिक दिशाहीनता का जीवंत प्रमाण निरुपित किया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस न केवल मुद्दाविहीन और वैचारिक तौर पर दिशाहीन नजर आ रही है, अपितु कांग्रेस में आज कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है। नतीजतन कांग्रेस में नेतृत्व के नाम पर गुटबाजी बढ़ रही है। श्री साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में 36 गुट हैं और नेता व कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप मढ़कर अपमानित करने भी बाज नहीं आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्लीपर सेल कह देते हैं तो कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता उनके खिलाफ बेहिचक मोर्चा खोल रहे हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद बघेल समेत बड़े नेताओं पर की गई टिप्पणियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री की हुई छीछालेदर को प्रदेश भूला नहीं है। इतना सब होने के बावजूद कांग्रेस इन सारे घटनाक्रमों से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। गुटबाजी और मनमानियों ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढाँचे को चरमरा कर रख दिया है और नौबत अब अपने ही छात्र संगठन के आंदोलन-प्रदर्शन में भी गुटबाजी तक आ गई है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री साहू ने कहा कि कांग्रेस व उसके सहयोगी संगठनों का आलम यह है कि हर जिले में नेता एक-दूसरे की शिकायत कर रहे हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस की अंतर्कलह के इस दौर में कौन-से गुट को राहुल गांधी का आशीर्वाद मिलता है, क्योंकि कांग्रेस लोकतंत्र और परफॉर्मेंस से नहीं, बल्कि गांधी परिवार के आशीर्वाद से चलती है। श्री साहू ने कहा कि यह सभी सत्ता के लालची लोग हैं और अपने-अपने हितों के लिए गुटबाजी करते हैं। छत्तीसगढ़ के विकास के लिए कांग्रेस ने कोई काम नहीं किया। आज ऊहापोह और आपसी विश्वास के संकट से उपजी गुटबाजी के चलते कांग्रेस सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। इतना ही नहीं, कांग्रेस के पूरे शासनकाल को सत्ता और संगठन में मचे घमासान के लिए ही जाना जाएगा। कांग्रेस के अंदर जो गुटबाजी और अंतर्कलह का घमासान मचा हुआ है, एक-दूसरे की जो टांग खिंचाई चल रही है, उसके चलते कांग्रेस पूरे देश में सिमटकर रह गई है और अब छत्तीसगढ़ में विधानसभा से लेकर हाल के निकाय व पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस की दुर्गति हुई है।