चाय पर चर्चा

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Discussion over tea

पत्रकार दीपक तिवार

कवर्धा। आज शहर की चाय की दुकानों, पान ठेलों, मोहल्लों और जमीन-जायदाद के कारोबार से जुड़े लोगों की बैठकों में एक ही मुद्दा गर्म है कवर्धा के रजिस्ट्री ऑफिस की कार्यप्रणाली। चाय की चुस्कियों के बीच लोग आपस में चर्चा करते नजर आ रहे हैं कि रजिस्ट्री कार्यालय में बिना “सेवा शुल्क” के काम होना लगभग नामुमकिन हो गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कवर्धा रजिस्ट्री ऑफिस में बैठे उप पंजीयक पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि दस्तावेज लेखकों के माध्यम से हर रजिस्ट्री पर मोटी रकम वसूली जा रही है। चर्चा यह है कि किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने से पहले दस्तावेज लेखकों के जरिए ₹5000 से लेकर ₹8000 और कई मामलों में ₹10000 तक की मांग की जाती है।

अगर नियम-कानून की बात करें तो दस्तावेज लेखक का अधिकार केवल दस्तावेज तैयार करने तक सीमित होता है। दस्तावेज तैयार करने के लिए निर्धारित शुल्क लगभग ₹500 के आसपास बताया जाता है। लेकिन चाय पर चर्चा करने वालों का कहना है कि यहां नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है।

चर्चा यह भी है कि रजिस्ट्री कार्यालय के भीतर लगभग सभी दस्तावेज लेखक दिनभर कार्यालय में ही घूमते नजर आते हैं। आम लोगों का कहना है कि दस्तावेज लेखक ही पूरे काम की कड़ी बने हुए हैं। वही दस्तावेज तैयार करते हैं, वही लोगों से पैसे की बात करते हैं और वही दस्तावेज लेकर सीधे उप पंजीयक के पास पेश करते हैं। कई लोग यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि रजिस्टार के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करने का काम भी यही दस्तावेज लेखक या उनके कर्मचारी करते हैं।

नियमों के अनुसार दस्तावेज लेखक का काम केवल दस्तावेज तैयार करना है, लेकिन चर्चा यह है कि व्यवहार में वही पूरे रजिस्ट्री प्रक्रिया के संचालक बन गए हैं। दस्तावेज तैयार करने के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं और लोगों का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा रजिस्ट्री कार्यालय तक भी पहुंचता है।

जमीन कारोबार से जुड़े लोगों में इस व्यवस्था को लेकर खासा असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि जब रजिस्ट्री का काम केवल एक ही कार्यालय में होना है और रोजमर्रा के काम भी इसी से जुड़े हैं, तो मजबूरी में लोगों को पैसे देने पड़ते हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर ध्यान देंगे या फिर चाय की दुकानों और पान ठेलों में चल रही यह चर्चा सिर्फ चर्चा बनकर ही रह जाएगी। फिलहाल शहर में “चाय पर चर्चा” का यह मुद्दा लोगों के बीच काफी तीखे अंदाज में उबल रहा है।

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