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दिनभर में चल रही गिनती की ट्रेने उसमें भी ज्यादातर देर से, खत्म नहीं हो रहा यात्रियों का इंतजार

रायपुर। कोयला ढुलाई और पटरियों में कार्य के चलते ट्रेनों ने यात्रियों को बेहद परेशान कर रखा हैं, जो ट्रेन पहले यात्रियों के बीच अपने निर्धारित समय से स्टेशन पहुंचने के नाम से जानी जाती थी, अब उसकी पहचान सबसे अधिक विलंब होने वाली ट्रेन से होने लगी हैं। रायपुर से गुजरने वाली हावड़ा-सीएसटीएम, शालीमार, उत्कल एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस समेत इंटरसिटी एक्सप्रेस यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन हुआ करती थी, क्योंकि यह ट्रेन समय पर पहुंच जाती थी, लेकिन वर्तमान में इन ट्रेनों की चाल बिगड़ी हुई। यह ट्रेन 5 से 6 घंटे देरी से चल रही हैं।

वर्तमान में 64 ट्रेन रद्द चल रही है। 24 ट्रन महीने भर से रद्द चल रही है। वही 22 और 18 ट्रेनों काे रेलवे ने बीते दिनों राजनांदगांव व कलमना व अनूपपुर-अम्लाई के बीच अलग-अलग कार्यों के चलते रद्द कर रखा है। इनदिनों रायपुर से दिनभर में लगभग 30 ट्रेनों आना-जाना कर रही है। पटरियों में गिनती के ट्रेन चलने के बावजूद लगभग सभी ट्रेने घंटो विलंब चल रही हैं। स्टेशनों में यात्रियों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। यात्री ट्रेन के निर्धारित समय पहुंचने के बाद स्टेशन में घंटो का समय बिताना पड़ रहा।रेलवे ने ट्रेनों को रद्द पटरियों के काम में तेजी लाने के लिए किया हैं, लेकिन रेलवे ने इस आपदा को भी सुनहरे अवसर में बदल दिया है। एक बार फिर मालगाड़ी के परिचालन में तेजी देखने को मिली हैं। इस वजह से यात्री ट्रेन के विलंब होने की समस्या खत्म ही नहीं हो रही है। रेलवे जानकारों का कहना है, रेलवे ने पहले मालगाड़ी का परिचालन प्रभावित होने से बचाने के लिए 24 ट्रेनों को रद्द किया ताकि ट्रैक खाली रहे, और समय पर मालगाड़ी पहुंच सके। इस वक्त 64 ट्रेन रद्द है, और मुंबई और हावड़ा रूट में 30 ट्रेन दौड़ रही है। ऐसे में यात्री ट्रेनों के रद्द नहीं होनी चाहिए। लेकिन रेलवे ने मालगाड़ी की संख्या बढ़ाकर फिर ट्रेनों को स्टेशन या फिर आउटर में घंटो रोक दिया जा रहा। खाली ट्रेक का उपयोग रेलवे कोयला ढुलाई के लिए कर रहा है।

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