नई दिल्ली। भारी कर्ज के बोझ से जूझ रही देश की प्रमुख दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया (VIL) को केंद्र सरकार ने एक बार फिर बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कंपनी के ₹87,695 करोड़ के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया को फ्रीज करने और इसके भुगतान पर पांच साल का ब्याज-मुक्त मोरेटोरियम देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
सरकारी फैसले के मुताबिक अब यह बकाया राशि वित्त वर्ष 2031-32 से 2040-41 के बीच चुकाई जाएगी। इस अवधि में कंपनी पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं लगेगा। इससे वोडाफोन आइडिया को तत्काल वित्तीय राहत मिलेगी और वह अपने नेटवर्क विस्तार, 4G-5G सेवाओं और संचालन सुधार में निवेश कर सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) 3 फरवरी 2020 की डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइंस और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर AGR बकाया की पुनः समीक्षा करेगा। सरकार द्वारा गठित एक समिति इस समीक्षा का अंतिम फैसला करेगी, जो सरकार और कंपनी—दोनों पर बाध्यकारी होगा।
हालांकि यह भी साफ किया गया है कि 2017-18 और 2018-19 के AGR बकाये में कोई बदलाव नहीं होगा। इन वर्षों की राशि सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2020 के आदेश के अनुसार पहले ही तय हो चुकी है और इनका भुगतान 2025-26 से 2030-31 के बीच निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ही किया जाएगा।
यह राहत पैकेज सुप्रीम कोर्ट के 27 अक्टूबर और 3 नवंबर 2025 के फैसलों के अनुपालन में दिया गया है। कोर्ट ने सार्वजनिक हित, सरकार की कंपनी में हिस्सेदारी और करीब 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए AGR मुद्दे पर पुनर्विचार में कोई कानूनी बाधा नहीं मानी थी।
गौरतलब है कि खराब वित्तीय स्थिति के बावजूद वोडाफोन आइडिया देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। रिलायंस जियो और एयरटेल के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनी लगातार दबाव में रही है और सब्सक्राइबर बेस भी घटा है। ऐसे में सरकार का यह कदम न सिर्फ कंपनी के लिए जीवनरेखा, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

