CG NEWS: प्रदेश में संचालित अधिकांश प्राइवेट बसों द्वारा मनमर्जी से किराया वसूली किए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जहां ₹50 का निर्धारित किराया है, वहां ₹70 वसूला जा रहा है, और ₹150 की दूरी पर ₹200 तक वसूलने की पुष्टि कई यात्रियों ने की है। इससे स्पष्ट है कि बस संचालक परिवहन विभाग के निर्धारित किराया नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
किराया सूची बस में प्रदर्शित नहीं
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार प्रत्येक बस में किराया सूची (Fare Chart) लगाना अनिवार्य है ताकि यात्रियों को वास्तविक किराया पता चल सके। लेकिन प्रदेश की ज्यादातर बसों में न तो किराया सूची लगी है और न ही कंडक्टर किराया बताने में पारदर्शिता दिखाते हैं।
कंडक्टरों की मनमानी वसूली
यात्रियों का आरोप है कि कंडक्टर अपने हिसाब से किराया बताकर वसूली कर रहे हैं। कई मामलों में यात्रियों के विरोध करने पर उन्हें बदसलूकी का भी सामना करना पड़ता है।
परिवहन विभाग की लचर निगरानी
परिवहन विभाग द्वारा किराया निर्धारण तो किया जाता है, लेकिन बसों की रूट निरीक्षण, किराया जांच, यात्री शिकायतों पर कार्रवाई लगभग न के बराबर है। इसके कारण बस संचालकों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वे बिना किसी डर के मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?
परिवहन विभाग के अनुसार—बस में किराया सूची लगाना अनिवार्य है। निर्धारित किराए से अधिक पैसा लेना दंडनीय अपराध है। शिकायत मिलने पर बस संचालक का परमिट निलंबन, जुर्माना, या बस सीज तक की कार्रवाई संभव है। लेकिन इन नियमों का मैदान में कहीं पालन नहीं होता।
यात्रियों की जेब पर सीधा असर
दैनिक यात्रियों—मजदूरों, छात्रों, छोटे व्यापारियों—पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है।।एक यात्री ने बताया—
“हम प्रतिदिन बस से आते-जाते हैं। पहले जितना खर्च होता था अब उससे दोगुना देना पड़ रहा है। न तो टिकट मिलता है, न किराया तय। जो कंडक्टर बोले वही देना पड़ता है।”
जनता की मांग, सख्त कार्रवाई हो
यात्रियों का कहना है कि परिवहन विभाग कोनियमित चेकिंग, बसों का सर्वे, कंडक्टरों पर कड़ी कार्रवाई, सभी बसों में डिजिटल टिकटिंगजैसे कदम उठाने चाहिए ताकि जनता की लूट बंद हो सके। पत्रकार दीपक तिवारी कवर्धा जिला कबीरधाम

