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बस्तर-सरगुजा के बाद बिलासपुर संभाग की 25 सीटें खोलगी सत्ता के व्दार

रायपुर। बदलते -बिगड़ते समीकरणों के बीच राजनीतिक तक दलों को बस्तर-सरगुजा के साथ बिलासपुर पर फोकस करना पड़ रहा है। पहले यह माना जाता था कि बस्तर-सरगुजा जीतने का मतलब सत्ता की चाबी मिल जाना है।

लेकिन अब सत्ता के लिए बिलासपुर भी जीतना जरूरी है इसलिए भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं्की चुनावी दौरे और सभा करने का मतलब परिवर्तन औऱ भरोसा को पक्का करना है। बिलासपुर संभाग की 25 विधानसभा सीटों पर जीत सत्ता का व्दार खोलगी ।

भाजपा के परिवर्तन यात्रा के जवाब में कांग्रेस का 2 अक्टूबर से कांग्रेस भरोसा यात्रा शुरू होने वाली है। इस खास मुहिम के पीछे भाजपा और कांग्रेस का बस्तर -सरगुजा के बाद सबसे ज्यादा सीटों वाली बिलासपुर संभाग की 25 विधानसभा सीटों पर शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर के 12 तो सरगुजा के 14 सीटों के बाद बिलासपुर संभाग की 25 सीटें राजनीतिक दलों के आकर्षण के केंद्र बना हुआ है।

पहले यह माना जाता था कि बस्तर और सरगुजा जीत लिया तो सरकार बन जाएगी । लेकिन अब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की घोषणा के पहले सारे समीकरण बदल गए है। इसलिए भाजपा बार-बार पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय मंत्रियों की टीम को बिलासपुर संभाग में परिवर्तन की हवा को तूफानी बनाने के लिए चुनावी अभियान तेज कर दी है।

पिछले 20 दिनों में बीजेपी ने प्रदेश के 90 विधानसभा सीटों से होकर बीजेपी की परिवर्तन यात्रा गुजरी। इस यात्रा का शनिवार (30 सितंबर) को बिलासपुर में समापन होने वाला है। इसमें शामिल होने के लिए पीएम मोदी 30 सितंबर को छत्तीसगढ़ आ रहे है। बीते 16 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार छत्तीसगढ़ आयेंगे। उनके इस दौरे को सियासी नजर से काफी खास माना जा रहा है।

पीएम मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे के एक दिन पहले पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रायपुर में पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं के साथ बैठक की। गुरुवार को 6 घंटे तक चली मैराथन बैठक में पीएम मोदी के दौरे को तैयारियों की समीक्षा की गई है.। विधानसभा चुनाव जीतने की रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया। बीजेपी की परिवर्तन यात्रा शनिवार को पीएम मोदी की मौजूदगी में समाप्त होगी।

छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा संभाग बिलासपुर है। जहां 8 जिलों में 25 विधानसभा सीटें आती हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी कांग्रेस से पीछे रह गई थी। 25 में से कांग्रेस को 14 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि बीजेपी को 7, पूर्व सीएम अजित जोगी की पार्टी को एक और बीएसपी को दो सीटों पर कामयाबी मिली थी. जोगी कांग्रेस से अलग हुए धर्मजीत सिंह अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

इस लिहाज से बीजेपी बिलासपुर संभाग में अपनी स्थिति बेहतर करने में पूरी ताकत झोंक रही है। इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल और पूर्व आईएएस ओपी चौधरी भी इसी संभाग से आते हैं। इसलिए बीजेपी के बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी है।

पीएम मोदी से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी बिलासपुर संभाग में चुनावी सभा कर चुके हैं। माना जाता है कि छत्तीसगढ़ के सीएम पद की कुर्सी बिलासपुर से होकर गुजरती है। यही वजह है कि सभी पार्टियों की नजर इस संभाग पर टिकी हुई हैं।

25 सितंबर को राहुल गांधी ने बिलासपुर में बड़ी सभा को संबोधित किया है और छत्तीसगढ़ में फिर से कांग्रेस सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं। वहीं बीजेपी की परिवर्तन यात्रा आराध्य देवी महामाया माता के चरणों में माता टेकने जा रही है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो राजा महाराजाओं के जमाने में बिलासपुर का रतनपुर सैकड़ों साल तक छत्तीसगढ़ की राजधानी रही है. कलचुरी राजाओं की नगरी है. अब यही से पीएम मोदी बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के समापन के साथ सत्ता परिवर्तन का शंखनाद करने जा रही है।

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