CG High Court : delivers a historic verdict on maternity rights!
CG HIGH COURT: बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ नियमित सरकारी कर्मचारियों के साथ दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल, संविदा और कॉलेजों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं को भी मिलेगा।
मामला रायपुर की शिल्पी शुक्ला द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने मातृत्व अवकाश अवधि का वेतन नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी। विभाग ने यह कहते हुए लाभ देने से इनकार कर दिया था कि वह नियमित कर्मचारी नहीं बल्कि अतिथि व्याख्याता हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया और कहा कि किसी महिला कर्मचारी को केवल “अतिथि” या “संविदा” कर्मचारी बताकर मातृत्व संबंधी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि मातृत्व लाभ महिला कर्मचारी की सेवा श्रेणी पर निर्भर नहीं करता।
हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को मातृत्व अवकाश अवधि का बकाया वेतन तीन महीने के भीतर भुगतान किया जाए।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस फैसले का असर केवल एक याचिकाकर्ता तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य में कार्यरत हजारों संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल और अतिथि महिला कर्मचारियों को इस निर्णय से राहत मिल सकती है।
यह फैसला शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, नगरीय प्रशासन और अन्य विभागों में कार्यरत बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
