The High Court dismissed the hotelier’s petition, which had appealed to the Division Bench against the decision of the Single Bench.
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रेलवे भूमि पर कब्जा करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, बिना वैध और नवीनीकृत लीज के रेलवे की जमीन पर कब्जा रखने का कोई अधिकार नहीं है।वहीं, केवल लीज किराया या टैक्स जमा करने पर भी कब्धाधारी का जमीन पर कानूनी अधिकार नहीं बनता है। डिवीजन बेंच ने इस आधार पर दीपचंद कछवाहा की अपील को खारिज कर दी है।

दरअसल, बिलासपुर रेलवे जोनल मुख्यालय के रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाके में डेवलपमेंट का काम चल रहा है। इसके चलते रेलवे प्रशासन ने जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के दौरान रेलवे की जद में आने वाले मकान और दुकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
बिलासपुर स्टेशन के पास व्यावसाय करने वाले दीपचंद कछवाहा अनंता होटल परिसर में कारोबार करते थे। उन्होंने रेलवे के इस बेदखली की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी याचिका को 15 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने निराकृत कर दिया था।राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि, अपीलकर्ता के पक्ष में कोई वैध, पंजीकृत और प्रभावी लीज मौजूद नहीं है। केवल लीज किराया या टैक्स जमा करने से कानूनी अधिकार नहीं बनता। लीज समाप्त होने और नवीनीकरण न होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति अनधिकृत कब्जेदार माना जाएगा। रेलवे की भूमि का स्वामित्व केंद्र सरकार के पास है। रेलवे पर अवैध कब्जे हटाने का वैधानिक दायित्व है।हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि, रेलवे के वाणिज्यिक विभाग में पुनर्वास या वैकल्पिक दुकान देने की कोई नीति अस्तित्व में नहीं है।रेलवे स्टेशन के विस्तार और परिचालन आवश्यकताओं के लिए भूमि की आवश्यकता होने पर रेलवे को लीज न बढ़ाने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने माना कि, वर्तमान मामला पूरी तरह से डब्ल्यू ए 131 ऑफ 2026 के समान है, जिसमें पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि बिना वैध लीज के कब्जा रखने वालों को पुनर्वास का अधिकार नहीं है। इसलिए इस मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाने का कोई कारण नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या गंभीर खामी नहीं है। इसलिए उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नही हैं ।

