CHHATTISGARH : Supreme Court bans exhumation of bodies in Chhattisgarh…
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के दफनाए गए शवों को कथित रूप से कब्र से निकालकर दूसरे स्थान पर दफनाने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि अगली सुनवाई तक किसी भी दफनाए गए शव को कब्र से बाहर नहीं निकाला जाएगा।
यह अंतरिम आदेश जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दिया। मामला अनुच्छेद 32 के तहत दायर एक जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जिसमें मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत से अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन कथित रूप से शवों को हटाने की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल दफनाए गए शवों को आगे नहीं निकाला जाएगा और किसी भी तरह की जबरन खुदाई या स्थानांतरण पर रोक रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
याचिका में दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों को अपने गांव की सीमा के भीतर अपने मृत परिजनों को दफनाने से रोका जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों को इसकी अनुमति दी जाती है। आरोप है कि कुछ मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना शवों को कब्र से निकालकर गांव से दूर दूसरी जगह दफनाने की कोशिश की गई।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि धर्म, जाति या सामाजिक वर्ग की परवाह किए बिना हर व्यक्ति को अपने गांव में अंतिम संस्कार या दफन का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्य की ग्राम पंचायतों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सभी समुदायों के लिए दफन स्थलों को चिन्हित करें।
पुराने फैसले का हवाला
याचिका में Ramesh Baghel vs State of Chhattisgarh मामले का भी उल्लेख किया गया है। उस मामले में निजी जमीन पर दफनाने की अनुमति को लेकर न्यायमूर्तियों के बीच मतभेद सामने आए थे। एक पक्ष ने निजी भूमि पर दफन की अनुमति दी थी, जबकि दूसरे मत में निर्धारित कब्रिस्तान में ही दफन की बात कही गई थी।
कांकेर हिंसा
दिसंबर 2025 में कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। इस दौरान चर्चों में आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं हुईं तथा 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना ने राज्य में दफन अधिकार और सामुदायिक तनाव को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल दफनाए गए शवों को हटाने की किसी भी कार्रवाई पर रोक लग गई है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत विस्तृत सुनवाई के बाद आगे का फैसला करेगी।

