WEST BENGAL VOTER LIST : वोटर लिस्ट विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जानिए ममता की दलीले …

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WEST BENGAL VOTER LIST : Voter list dispute reaches Supreme Court, know Mamata’s arguments…

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में पेश हुईं और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही सभी दलीलें रख चुके हैं। मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को उन्होंने तमाम तथ्य बताए, लेकिन किसी ने नहीं सुना। इस पर CJI ने कहा कि नई याचिका में कुछ अतिरिक्त बिंदु जरूर हैं, लेकिन जो बातें वह कह रही हैं, वे पहले ही अदालत के सामने रखी जा चुकी हैं।

‘बंगाल को टारगेट किया जा रहा है’

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के नाम की स्पेलिंग में बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि भाषा और उच्चारण की तकनीकी गलतियों के नाम पर असली नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों में दस्तावेज स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन बंगाल के मामलों को खारिज किया जा रहा है।

इस दौरान ममता ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया और आरोप लगाया कि जानबूझकर बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।

32 लाख अनमैप्ड वोटर्स का दावा

वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट के प्रकाशन में अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और 14 फरवरी तक प्रक्रिया पूरी होनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग हर ऐसे वोटर का नाम सार्वजनिक करे, जिसका नाम सूची से हटाया गया है, और हटाने का कारण भी बताए।

CJI की अहम टिप्पणी

CJI ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि केवल सामान्य सूचना ही नहीं, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह समय फसल और त्योहारों का है, ऐसे में कई लोग अपने गृह जिले से बाहर होते हैं। CJI ने सवाल किया कि जब बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें हो रही हैं, तो असम या अन्य राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा।

अगली सुनवाई सोमवार को

सुनवाई के अंत में अदालत ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी किया। CJI ने कहा कि जरूरत पड़ी तो समयसीमा बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर सोमवार को अदालत के सामने आए। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को उपलब्ध ग्रुप-बी अधिकारियों और एसडीएम की सूची पेश करने को कहा गया है।

 

 

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