SONAM WANGCHUK CASE : Sonam Wangchuk case in SC, Centre says speech poses threat to national security
नई दिल्ली। लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। सरकार ने कहा है कि वांगचुक के सार्वजनिक भाषण राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और रणनीतिक रूप से संवेदनशील बॉर्डर एरिया के लिए खतरा बन सकते हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र ने साफ कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की आज़ादी का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा है। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की ओर से दायर याचिका में एनएसए के तहत हुई गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्न वराले की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट हिरासत आदेश की अपील की तरह समीक्षा नहीं करती। कोर्ट का दायरा सिर्फ इतना है कि हिरासत के कारणों और सामग्री का राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा संबंध है या नहीं।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अदालत को यह नहीं देखना चाहिए कि वह खुद संतुष्ट है या नहीं, बल्कि यह देखना है कि जिला मजिस्ट्रेट हिरासत आदेश को लेकर संतुष्ट थे या नहीं। उनके मुताबिक, जिला मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वांगचुक के भाषण युवाओं को भड़काने वाले हैं और इससे सार्वजनिक शांति बिगड़ सकती है।
मेहता ने यह भी कहा कि वांगचुक ने युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात की मिसाल देकर उकसाने की कोशिश की, जहां हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता देखी गई है। ऐसे बयान लद्दाख जैसे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में गंभीर खतरा बन सकते हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि हिरासत आदेश पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत पारित किया गया और चार घंटे के भीतर कार्रवाई की गई। एक डीआईजी ने वांगचुक से मुलाकात कर उनके भाषणों के वीडियो दिखाए, जिन्हें उन्होंने स्वीकार भी किया।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह राजस्थान के जोधपुर स्थित सेंट्रल जेल में बंद हैं।

