BIG BREAKING : Supreme Court stays new UGC rules!
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नियमों को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट मानते हुए उन पर तत्काल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इससे समानता के संवैधानिक अधिकार पर असर पड़ सकता है।
क्या है विवाद
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को पूरी तरह बाहर रखते हैं और उन्हें स्थायी रूप से संभावित दोषी की श्रेणी में खड़ा करते हैं। उन्होंने नियम की धारा 3(c) को चुनौती देते हुए कहा कि इसमें केवल SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव को परिभाषित किया गया है, जबकि जनरल कैटेगरी को संरक्षण से वंचित रखा गया है।
समानता समितियों पर सवाल
नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाएं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। आलोचकों का कहना है कि नियमों में प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, जिससे इनके दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है।
देशभर में विरोध
इन नियमों को लेकर कई राज्यों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नया ढांचा सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकता है और सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय करता है।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब सरकार को नियमों पर दोबारा स्पष्ट जवाब देना होगा।
अदालत ने साफ किया है कि अगली सुनवाई तक यूजीसी के नए नियम प्रभावी नहीं रहेंगे।

