आंजनेय विश्वविद्यालय में संगोष्ठी: नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में सिंधी भाषा का समावेश

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Seminar at Anjaneya University: Inclusion of Sindhi Language in the Context of New Education Policy 2020

रायपुर। आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा नई शिक्षा नीति–2020 के परिप्रेक्ष्य में सिंधी भाषा का समावेश विषय पर अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य सिंधी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उच्च शिक्षा में उनके प्रभावी समावेश पर गहन विमर्श करना था । विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः शिक्षा के केंद्र में लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और पहचान का संवाहक होती है। सिंधी जैसी समृद्ध भाषा का शिक्षा प्रणाली में समावेश न केवल भाषायी विविधता को सशक्त करेगा, बल्कि भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी करेगा। कार्यक्रम की रूपरेखा और विषयवस्तु का संगोष्ठी परिचय विश्वविद्यालय की निदेशक (अकादमिक) डॉ. संध्या वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक स्थान देना, नीति की मूल भावना है। उन्होंने सिंधी भाषा को भारतीय बहुभाषी परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए इसके अकादमिक उपयोग और शोध की संभावनाओं को विस्तार से रेखांकित किया।

इस अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया। समारोह का उद्देश्य समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में योगदान की सराहना और समाज में उनके कार्यों को रेखांकित करना था। इस अवसर पर डॉ. दिलीप रमानी जी (MBBS, MD, DM – कार्डियोलॉजी) एवं श्री उदय शादाणी जी का विश्वविद्यालय परिवार द्वारा सम्मान किया गया।

संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, डॉ. जे. सी. अजवानी, पूर्व विभागाध्यक्ष (मनोविज्ञान, कला एवं वाणिज्य), शासकीय कन्या कॉलेज, देवेंद्र नगर, रायपुर द्वारा दिया गया। अपने विचारोत्तेजक व्याख्यान में उन्होंने भाषा और मनोविज्ञान के अंतर्संबंध पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से व्यक्ति का संज्ञानात्मक विकास अधिक सशक्त होता है। उन्होंने सिंधी भाषा की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक धरोहर और आधुनिक शिक्षा में उसकी प्रासंगिकता को उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया।

माननीय कुलाधिपति श्री अभिषेक अग्रवाल जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 भारत की आत्मा को शिक्षा से जोड़ने का ऐतिहासिक प्रयास है। सिंधी भाषा जैसी समृद्ध भाषाओं का संरक्षण केवल समाज की नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की भी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस विषय पर संगोष्ठी आयोजित किए जाने को दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इससे युवाओं में भाषायी गौरव और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा।

इसके पश्चात आयोजित ओपन माइक सत्र – “मेरी भाषा, मेरी पहचान” ने कार्यक्रम को जीवंत संवाद का मंच प्रदान किया। इस सत्र में श्री ललित जैसिंघ, श्री अमित जीवन, डॉ. (श्रीमती) काजल सचदेव ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने सिंधी भाषा को अपनी पहचान, स्मृति और सांस्कृतिक उत्तराधिकार से जोड़ते हुए भावनात्मक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। यह सत्र एक पैनल चर्चा के रूप में अत्यंत सारगर्भित सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में पुनः सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें श्री इंदर डोडवानी जी, श्री राजेश वधवानी जी, श्री सचिन मेघनानी जी, श्री अमित गिरवानी जी, श्री किशोर आहूजा जी, श्री बी. डी. डडानी जी, श्री सुरेश रहलानी जी, श्रीमती खुशी जीजू लोहजना जी एवं श्री सुरेश सचदेव जी को सम्मानित किया गया। यह सम्मान समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।

छात्रअधिष्ठाता डॉ. प्रांजली गनी द्वारा आंजनेय विश्वविद्यालय का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचारों और बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली पहलों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक साक्षी गुप्ता ने किया, धन्यवाद ज्ञापन डीन डॉ डी बी तिवारी ने दिया।

विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति

विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की। विद्यार्थियों ने भारत की एकता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय भाषाओं और परंपराओं के सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति को उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहना के साथ सराहा।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों, शिक्षाविदों, सिंधी समाज के प्रबुद्धजनों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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