CHHATTISGARH : Now “father” scam in Chhattisgarh…
रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार से जुड़े सरकारी दस्तावेजों को लेकर नया विवाद सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि जहां भूपेश बघेल के पिता का नाम सरकारी रिकॉर्ड में स्वर्गीय नंद कुमार बघेल दर्ज है, वहीं उनके सगे भाई हितेश बघेल के सरकारी अभिलेखों में पिता का नाम सदाराम दर्ज पाया गया है। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में पिता के नाम में इस तरह का अंतर जानबूझकर किया गया, ताकि संपत्ति और लेन-देन से जुड़ी जानकारी को अलग-अलग पहचान के जरिए छिपाया जा सके। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान हितेश बघेल और उनके रिश्तेदारों के नाम करोड़ों रुपये की जमीन और अन्य संपत्तियां अर्जित की गईं।
सूत्रों के मुताबिक सत्ता के दौरान अर्जित संपत्तियों को ठिकाने लगाने के लिए जमीन, भवन और अन्य चल-अचल संपत्तियों के पंजीयन में पिता और परिजनों के नामों में बदलाव किया गया। आरोप यह भी है कि जमीनों की खरीद-फरोख्त में असली पहचान छिपाने के लिए दस्तावेजों में काट-छांट और हेरफेर की गई।
मामले को छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHiPS) के जरिए हुए भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण से भी जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जमीनों के रजिस्ट्रीकरण और लैंड रिकॉर्ड का डिजिटल डेटा तैयार किया गया, जिसकी आड़ में कई संदिग्ध लेन-देन किए गए।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि हितेश बघेल के दस्तावेजों में पिता का नाम केवल “सदाराम” दर्ज किया गया, जबकि पूरा नाम और जाति स्पष्ट नहीं की गई। इसे लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि एक ही पिता की संतान के सरकारी रिकॉर्ड में पिता का नाम अलग-अलग कैसे हो सकता है।
फिलहाल यह पूरा मामला आरोपों और दावों तक सीमित है। राज्य सरकार इस पर स्वतः संज्ञान लेती है या औपचारिक शिकायत का इंतजार करती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

