हम अगर तपस्या नहीं कर सकते हैं, तो अनुमोदना कर ही सकते हैं: विराग मुनि

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रायपुर। संसार में रहते हुए क्रियाएं करना जरूरी है। इस दौरान हमसे किसी तरह का पाप न हो, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। एमजी रोड स्थित श्री जैन दादाबाड़ी में श्री विनय कुशल मुनिजी महाराज साहब के सानिध्य में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में विराग मुनि महाराज साहब ने ये बातें कही।

उन्होंने कहा कि आहार जीवन का आधार है। हम रोज आहार कर रहे हैं। आहार में क्या लेना है और कितना लेना है, इसका विचार नहीं कर रहे हैं। विषयों का विराग जरूरी है। इसे हर किसी को समझना होगा। अपरिग्रह के साथ जीवन जिएं। अर्थात जितना जरूरी है, उतना ही लें। ये प्रयास करें कि आपके जीवन में कम से कम कर्मों का बंध हो। कम से कम पाप हों। हम अच्छा से अच्छा जीवन कैसे जी सकते हैं, हमें इसकी चिंता करनी है। सुलीभद्र जी से सीखिए जिन्होंने इतना अच्छा जीवन जिया। हम ऐसा जीवन नहीं जी पा रहे हैं तो इसके पीछे मुख्य कारण यही है कि हमारे भीतर धर्म के लिए अहोभाव नहीं हैं। आज स्थिति में है कि लोगों को भक्ष-अभक्ष का भी ज्ञान नहीं रह गया है। होटलों में पारणा किया जा रहा है। विवेक रखें। जैन धर्म में जन्म लिया है। जिन शासन के नियमों का पालन करें।

जो प्राप्त है, वहीं पर्याप्त है
मन में संतोष लाना ही होगा

मुनिश्री ने कहा, लोग धन प्राप्ति के लिए पूरा पुरुषार्थ कर रहे हैं। पानी की गिरती बूंद की तरह जीवन बिताता जा रहा है। दूसरों की संपत्ति को देख हम दुखी एवं ईर्ष्या में लगे हैं। जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है। मन में संतोष लाना होगा। यह चातुर्मास गुरु बिना समय वापस नहीं मिलेगा। संसार को कब तक पकड़े रहेंगे? मरते दम तक? संसार की चिंता में डूबे हैं। ज्ञान, दर्शन, चारित्र्य की चिंता कर आत्म कल्याण करना होगा। वही साथ जाएगा।

निंदा करते घंटों बीत जाएं, पता नहीं
चलता पर प्रवचन में मन नहीं लगता

उन्होंने कहा कि निंदा में रस आता है। घंटों बीत जाए, पता नहीं चलता। वहीं लोगों को प्रवचन-स्वाध्याय में कोई रस नहीं मिलता। महावीर ने बताया है कि इस जगत में कोई भी सुख नहीं दे सकता। हम मोह-माया, राग-द्वेष में एवं इंद्रियों के वश में विचारों से और न जाने कितना गिरेंगे। समाचार पत्रों में रोज ऐसी घटनाएं आ रही हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद मन दहल जाता है‌‌।

महान सिद्धि तप के अनुमोदनार्थ 26 को कार्यक्रम

आत्मस्पर्शीय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पारस पारख और महासचिव नरेश बुरड़ ने बताया कि महान सिद्धि तप के अंतर्गत शुक्रवार को तेला रहा। समस्त तपस्वियों के अनुमोदनार्थ 26 अगस्त को सुबह 9 बजे से प्रार्थना होगी। गुरावार को श्रीमति श्वेता बोथरा का 30वां तप रहा। वे मासखमण की ओर अग्रसर हैं। 26 को बॉम्बे से आए सुप्रसिद्ध संगीतकार नरेंद्र वाणीगोता ‘निराला’ द्वारा बोली बोली जाएगी, जिसका आप लाभ उठा सकते हैं। मुकेश निमाणी और गौरव गोलछा ने बताया कि दादा गुरुदेव इकतीसा जाप के अंतर्गत हर रात 8.30 से 9.30 बजे तक श्री जैन दादाबाड़ी में प्रभु भक्ति का क्रम जारी है।

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