कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई शुरू, विरोध कर रहे ग्रामीण और एक्टिविस्ट हिरासत में, किसान नेता टिकैत ने भी जताया विरोध

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उदयपुर। सरगुजा जिला के उदयपुर क्षेत्र में परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल खदान के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। आज सुबह से ही कोल खदान जाने वाले साल्ही, परसा मोड़, बासेन के हर मार्ग पर पुलिस बल तैनात हैं। यहां हजारों की संख्या में पेड़ों को काटे जाने की बात कही जा रही है।

 

आंदोलनकारियों को घर से उठाया

बताया जा रहा है कि घाटबर्रा के पेंड्रा मार जंगल में पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। दोपहर डेढ़ बजे समाचार लिखे जाने तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके थे, देर शाम तक हजारों पेड़ काटने का अनुमान है।
वहीं पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले कुछ आंदोलनकारियों को पुलिस आज सुबह उनके घर से उठाकर ले गई, ताकि कोई बाधा न पैदा हो। धरना स्थल हरिहरपुर में भी पुलिस बल तैनात हैं। सैकड़ों की संख्या में जिले से पुलिस बल भेजा गया है।

‘तुम्हारी नेतागिरी से हमें दिक्कत है’

आज सुबह पुलिस रामलाल करियाम साल्ही, जयनंदन सिंह पोर्ते घाटबर्रा को पुलिस अपने साथ ले गई है। इसके अलावा मुनेश्वर सिंह और आनंद कुसरो के घर भी पुलिस गई थी। फिलहाल कितने लोगों को पुलिस लेकर गई है इसकी वास्तविक जानकारी अब तक नहीं मिल सकीय है। जो वीडियो सामने आये हैं, उसमें पुलिस आमजनों के सवाल पर बोल रही है-तुम्हारे नेतागिरी से हमें दिक्कत है, इसलिए लेकर जा रहे हैं।

जानिए परसा ईस्ट केते बासेन कोल ब्लॉक के बारे में

परसा ईस्ट केते बासेन कोल ब्लॉक के लिए 2682 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वन विभाग का है और यह क्षेत्र वनों से आच्छादित है, यही कारण है कि लंबे समय से इस परियोजना का विरोध उदयपुर क्षेत्र में चल रहा है। वर्ष 2013 में इस क्षेत्र में कोयले की खुदाई एवं ढुलाई की प्रक्रिया शुरू हुई है।

कांग्रेस सरकार ने अनुमति दी, फिर रोक लगाया

पिछले वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ में आसीन कांग्रेस ने सरकार ने लगभग 134.84हेक्टेयर क्षेत्र में कोल उत्पादन की अनुमति दी थी। इस दौरान हजारों की संख्या में फोर्स लगाकर 43.6 हेक्टेयर वन भूमि से लगभग 10000 पेड़ काटे गए थे। तब भी क्षेत्र में काफी विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी और फिर आनन-फानन में कटाई पर रोक लगा दी गई थी।

पहले रोक अब फिर से अनुमति

इसी बीच कांग्रेस सरकार ने 91.2 हेक्टेयर भूमि पर वनों की कटाई पर रोक लगा दी, किन्तु 2023 में दिसंबर महीने में प्रदेश में सरकार बदलते ही इस रोक को हटाने का काम किया गया, अब पुन: वनों की कटाई हेतु अनुमति जारी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने पेड़ों को कटवाने हजारों की संख्या में घटबर्रा एवं आसपास के क्षेत्रों पुलिस बल तैनात कर स्थानीय निवासियों के जंगल में प्रवेश को रोक दिया गया है।

आलोक को घंटों हिरासत में रखकर छोड़ा

इस बीच छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला और उनके साथ आंदोलनस्थल जा रहे अजय टीजी को कटघोरा में स्कार्पियो वहां पर सवार कुछ पुलिस कर्मियों ने रोक लिया और खुद को क्राइम ब्रांच का बताते हुए अपने साथ बिलासपुर ले आये।अलोक शुक्ला ने TRP न्यूज़ को बताया कि उनके मोबाइल भी छीन लिए गए और इन्हें बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में घंटों बिना बताये रोककर रखा गया। काफी बहस और कथित एसपी से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने इन्हें छोड़ दिया।

बिलासपुर में हुआ विरोध प्रदर्शन

हसदेव बचाओ आंदोलन की बिलासपुर इकाई के कार्यकर्ताओं ने कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की हो रही कटाई और आंदोलनकारियों तथा साथियों की गिरफ़्तारी के विरोध में बिलासपुर के देवकी नंदन चौक पर प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए इन सभी ने कटाई का जमकर विरोध किया।

टिकैत ने पेड़ों की कटाई पर उठाया सवाल

हसदेव अरण्य में कोयला खदानों के लिए पेड़ कटाई का विरोध कर रहे आंदोलनकारियों को आज सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। इस मुद्दे पर किसान नेता राकेश टिकैत ने एक वीडियो जारी कर इस कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि हरदेव अरण्य के आदिवासी अपना जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इनको उठाकर जेल में बंद किया जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसान, मज़दूरों को तीन-चार जगह से उठाया गया है। हम सबको हसदेव चलना पड़ेगा।

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