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कोविड के तीसरे वेव में जब फिल्मों की हो रही शूटिंग पोस्टपोन, संजय दत्त करना चाहते हैं अपनी फिल्मों को रिलीज

संजय दत्त की काफी समय से कोई भी फिल्म बड़े पर्दे पर नहीं आई है. साल 2019 में उनकी आखिरी फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज हुई थी. संजय दत्त की अभी तीन अहम फिल्में रिलीज होने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने कहा है कि, वो इस साल का इंतजार कर रहे हैं और देश में कोविड-19 की चिंता के बीच बेहतरीन की उम्मीद कर रहे हैं और अपनी तीनों ही फिल्मों को रिलीज करना चाह रहे हैं.

संजय द्तत ने कहा कि, “मेरे प्रोजेक्ट्स, शमशेरा, केजीएफ 2 और पृथ्वीराज बहुत ही शानदार हैं, और मैं बेहद उत्साहित था और उनकी रिलीज का इंतजार कर रहा था. लेकिन, कोविड के मामलों में बढ़ोतरी की वर्तमान स्थिति के साथ, सब कुछ हवा में है और अनिश्चित है,”. “ये फिल्में बड़े पर्दे के अनुभव के लिए बनाई गई हैं, लेकिन इसका आनंद तभी लिया जा सकता है जब देश के लिए कोविड-19 की स्थिति कंट्रोल में हो. अभी, मैं केवल ये उम्मीद करता हूं कि चीजें हमारे लिए बेहतर हों और इसके लिए लोगों को सावधानी बरतते हुए मास्क लगाना जारी रखना होगा.”

अपनी फिल्में करना चाहते हैं संजय दत्त रिलीज

62 वर्षीय संजय दत्त ने कहा कि, जबकि वो “बड़े पर्दे पर नहीं आ पाने को बेहद मिस कर रहे हैं”, ओटीटी प्लेटफार्म्स के लिए आभारी हूं. पिछले दो वर्षों में उनकी ओटीटी पर तीन फिल्में रिलीज हुई हैं- सड़क 2, तोरबाज और भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया.

उन्होंने कहा कि, “बड़े पर्दे का अपना अट्रैक्शन होता है और ये दर्शकों को फिल्म का पूरा आनंद लेने का मौका देता है. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सिनेमा कैसे डेवलप हो रहा है और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की तेजी के साथ, हर कोने में दर्शकों के पास इतनी कंटेंट्स हैं जो हर जरूरत को पूरा करती हैं. इसलिए मेरी राय में ये दोनों समान रूप से अहम हैं और खूबसूरती से को-एग्जिस्ट हो सकते हैं, ”.

कोराना महामारी के बीच संजय दत्त ने जीती कैंसर से जंग

कोरोना महामारी के बीच ही अभिनेता संजय दत्त ने कैंसर से भी जंग लड़ी. लेकिन उनका कहना है कि अब वो पूरी तरह से ठीक हैं. संजय दत्त ने अपनी बात को खत्म करते हुए बोला कि, “भगवान की कृपा से और मेरे परिवार, डॉक्टरों और शुभचिंतकों के सपोर्ट से, मैं अपने पैरों पर वापस आ गया हूं और जाने के लिए उत्सुक हूं. मुझे खुशी है कि ये अतीत में है और मैं उस कठिन दौर से पूरी तरह से उबरने में सक्षम था. ये सब इच्छाशक्ति और विश्वास को बनाए रखने के लिए आता है, ”.

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