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श्रम न्यायालय ने हादसे को लेकर कार्यवाही शुरु की, अब तक मुख्य अभियंता बिजली विभाग और ठेकेदार को नोटिस जारी

रायगढ़। बीते तीन महीने पहले जिले के खरसिया तहसील में छग स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के टावर लाइन की शिफ्टिंग में काम चल रहा था,इस दौरान एक टावर गिर गया था। इसमें चार श्रमिकों गोविंद भुइया, सुरेश रविदास, ईश्वर तुरी और युगल भुइया निवासी हजारीबाग झारखंड की मौत हो गई थी।

बताया जा रहा था कि शिफ्टिंग का ठेका रीवा के आलोक सिंह चंदेल की शारदा कंस्ट्रक्शन को मिला था। घटना के बाद ठेका कंपनी के लोग मौके से फरार हो गए थे।

सीएसपीटीसीएल ने घटना की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालकर पल्ला झाड़ लिया था। ठेका कंपनी शारदा कंस्ट्रक्शन के संचालक व कर्मचारी फरार हो गए थे। छग स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अधिकारी भी हादसे के बाद पल्ला झाड़ते नजर आ रहे थे। पुलिस ने ठेकेदार आलोक सिंह पिता जागेंद्र सिंह निवासी रीवा मप्र, गायत्री सिंह पिता जागेंद्र सिंह, ज्योति सिंह पिता चंद्रपाल सिंह, नावेंद्र पांडे, मनमोहन दुबे और राजीव तिवारी के खिलाफ खरसिया थाने में धारा 304 ए, 337 और 34 के तहत अपराध दर्ज किया था।

कुछ दिन बाद मामले में मनमोहन दुबे को गिरफ्तार किया गया था। कालांतर में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी।

प्रारंभिक जांच में यह पाया गया था कि मृत श्रमिकों का बीमा भी नहीं था। सीएसपीटीसीएल ने इस काम में सबसे ज्यादा लापरवाही बरती थी। सरकारी कंपनी होने के बावजूद श्रमिकों के बीमा दस्तावेज चेक नहीं किए गए थे। इसका लाभ लेकर ठेका कंपनी ने भी किसी श्रमिक का बीमा नहीं कराया था। उनकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया था। जबकि इस दर्दनाक हादसे के बाद बाकी सरकारी विभागों ने भी मौन साध लिया था। लम्बे समय तक श्रम विभाग ने तो केस ही दायर नहीं किया था ।

अब मिल रही जानकारी के अनुसार श्रम न्यायालय ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले में जांच प्रांरभ करते हुए,इस बात की जानकारी दी है कि दुर्घटना में प्रत्यक्ष रूप से दोषी ठेकेदार और बिजली विभाग के आला अधिकारी मुख्य अभियंता को नोटिस दी गई है। जल्दी ही घटना की गंभीरता के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।। मतलब था स्पष्ट है कि श्रम न्यायालय प्रकरण में किसी भी दोषी को बक्शने के मूड में नही है।

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