RAIPUR NEWS : शरणार्थियों पर आंदोलनकारियों का वार, छत्तीसगढ़ियों के हक में आर-पार की लड़ाई का ऐलान!

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RAIPUR NEWS : Protesters attack refugees, declare all-out fight for the rights of Chhattisgarhis!

रायपुर। हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में आयोजित राज्य आंदोलनकारी संगठनों की संयुक्त बैठक में पाकिस्तान से आये शरणार्थियों तथा कुछ व्यापारी/भूमि मालिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में राज्य आंदोलनकारी छसपा, छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता दाऊ जी. पी. चंद्राकर ने की और किसान मोर्चा के अध्यक्ष अनिल दुबे ने एजेंडा पेश किया।

बैठक के बाद सर्वसम्मति से पास किए गए प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं –

शरणार्थियों पर आरोप : बैठक में कहा गया कि कुछ पाकिस्तानियों/सिंधी शरणार्थियों पर आयकर-जीएसटी वसूली, मिलावट और अवैध आर्थिक गतिविधियों के आरोप हैं। बैठककारियों ने जिला निर्वाचन कार्यालय और चुनाव आयोग को शरणार्थियों की सूची भी भेजे जाने का दावा किया और कहा कि जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

भूमि विवाद और औद्योगिक स्वामित्व: प्रस्तावों में यह भी कहा गया कि राज्य के कुछ उद्योगपतियों और बाहरी प्रभावशाली समूहों ने कथित तौर पर नजूल/आदिवासी और सरकारी ज़मीन पर कुटरचित दस्तावेज बनाकर कब्जा किया है। बैठककारियों ने पुरानी रिकार्डिंग (1929 से) मिलान कर जांच कराने की मांग की।

कानूनी व आर्थिक मदद का आश्वासन : जिन आंदोलनकारी क्षेत्रों में शरणार्थियों के खिलाफ मामला दर्ज होने पर छत्तीसगढ़ियों को दायर किए गए एफआईआर से भय का सामना करना पड़ रहा है, उन पर कानूनी मदद और जमानत हेतु आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव पारित हुआ। क्रांति सेना के लिए एक लाख रुपये का चेक सहयोग देने का भी प्रस्ताव पास किया गया।

धरना-प्रदर्शन व आर-पार की चेतावनी : प्रस्तावों के अनुरूप आज सचिनों दरबार/प्रशासनिक कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना आयोजित करने और शरणार्थियों के विरुद्ध एफ.आर.आर. (FIR / संबंधित कार्रवाई) कराने की घोषणा की गई।

किसान-संरक्षण व प्रदूषण विरोध: बैठक में करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कथित प्रदूषण के कारण किसानों की फसल खराब होने के आरोप पर भी जनआंदोलन कराने का निर्णय लिया गया। आंदोलन के दौरान खराब फसलों को प्रदर्शन-स्थल पर रखकर विरोध करने का ऐलान किया गया।

बैठक में शामिल नेताओं दाऊ जी. पी. चंद्राकर, अनिल दुबे, जागेश्वर प्रसाद, लालाराम वर्मा, वेगेद्र सोनवेर, चेतन देवांगन, अशोक कश्यप, शिवनारायण ताम्रकार, गोवर्धन वर्मा, बृजबिहारी साहू, रघुनंदन साहू, शिव तामकार, के. के. अग्रवाल, संतोष श्रीवास, गंगाराम साहू, हेमा महमल्ला, रितु महंत आदि ने प्रस्ताव पारित कर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की।

प्रस्तावों में किए गए कई आरोपों को लेकर संबंधित सरकारी विभागों और प्रशासन से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है। राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र कदम नहीं उठाए तो वे और कठोर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। वहीं कुछ प्रदेश-स्तरीय और नागरिक समूहों ने इस प्रकार के बयानों पर सोशल कूप्रोशोज़ व कानूनी रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी है और कहा है कि आपसी सौहार्द और विधिक प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।

 

 

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