Indus Water Treaty : सिंधु जल संधि बहाल करने के लिए रो रहा पाकिस्तान! भारत को 4 बार लिख चुका लेटर

Indus Water Treaty : नई दिल्ली। आतंकवाद पर पाकिस्तान को गहरी चोट देने के लिए सिंधु जल समझौते को अपनी ओर से स्थगित करने के भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान की कोई दाल नहीं गल रही है।भारत से बार-बार अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए आग्रह करने के बाद पाकिस्तान ने इस संधि में मध्यस्थता निभाने वाले विश्व बैंक से भी संपर्क किया है और सूत्रों के अनुसार विश्व बैंक ने फिलहाल इसमें हस्तक्षेप करने को लेकर अपनी असमर्थता जता दी है।
विदेश मंत्रालय को भेजे गए पत्र
सरकारी सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय की ओर से अब तक चार पत्र भेजे गए हैं और इन सभी में समझौते को बहाल करने का आग्रह किया गया। चौथा पत्र इसी सप्ताह आया है। लगभग सभी में पाकिस्तान ने इससे अपने देश में समस्याएं बढ़ने का रोना रोया है। सूत्रों का कहना है कि जल शक्ति मंत्रालय ने ये पत्र विदेश मंत्रालय के पास भेज दिए हैं।
22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित भीषण आतंकी के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला किया था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई भी की। इसके बाद खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि खून (आतंकवाद के कारण) और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
सिंधु नदी को यमुना से जोड़ने का प्लान
सूत्रों के अनुसार भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद दोनों देशों के बीच बहने वाली सभी छह नदियों के पानी का अपनी तरह से इस्तेमाल करने के लिए ढांचा तैयार करने का काम मिशन के रूप में शुरू किया है। इसी के तहत ब्यास नदी और गंगा को जोड़ने के लिए 120 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण की योजना है।
सिंधु जल संधि से जुड़े एक सूत्र के अनुसार सिंधु नदी को यमुना से भी जोड़ने का भी विचार है। अगर ये दोनों परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो अतिरिक्त पानी के प्रबंधन की समस्या का समाधान हो जाएगा। इस परियोजना से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों की पानी की समस्या भी हल हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार शुरुआती चरण के प्रोजेक्ट अगले दो से तीन साल में पूरे हो जाने के आसार हैं और कई मंत्रालयों के अफसरों की एक साझा टीम परियोजनाओं के डीपीआर पर काम कर रही है।
सिंधु जल संधि से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी के अनुसार भारत की अपनी परियोजनाओं को लेकर जैसी तैयारी चल रही है, उसे देखते हुए पाकिस्तान में रबी की फसल पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। तब पाकिस्तान को सही मायने में भारत के फैसले का दर्द महसूस होगा। उसकी खरीफ की फसल भी एक हद तक प्रभावित हुई है, लेकिन असली असर रबी सीजन (दिसंबर-अप्रैल) के दौरान नजर आएगा।