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BREAKING : UPSC की नई चेयरपर्सन बनीं प्रीति सूदन

BREAKING: Preeti Sudan becomes the new chairperson of UPSC

1983 बैच की आईएएस अधिकारी और पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन UPSC की नई अध्यक्ष हैं. एक महीने पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष मनोज सोनी ने अपना कार्यकाल खत्म होने के पहले ही इस्तीफा दे दिया था. प्रीति सूदन अब मनोज सोनी की जगह 1 अगस्त से कार्यभर संभालेंगी. आइए जानते हैं UPSC की नई अध्यक्ष प्रीति सूदन के बारे में खास बातें.

इन विभागों में दे चुकी हैं सेवाएं –

प्रीति सूदन साल 2022 में यूपीएससी से जुड़ी थीं और अब उन्हें अध्यक्ष पद के लिए नियुक्त किया गया है. हरियाणा की रहने वाली प्रीति सूदन ने साल 1983 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी. सिर्फ यूपीएससी ही नहीं, प्रीति सूदन महिला एवं बाल विकास और रक्षा मंत्रालय के अलावा खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव के रूप में भी काम कर चुकी हैं. प्रीति आंध्र प्रदेश कैडर की आईएएस हैं, 37 वर्षों का व्यापक अनुभव लेकर उन्होंने जुलाई 2020 में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के रूप में रिटायर हुई थीं. यूपीएससी के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने कई अहम फैसलों में सही राय दी है. उनके काम को देखते हुए अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया है.

प्रीति सूदन ने प्रमुख बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान और आयुष्मान भारत मिशन के अलावा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल आयोग के कामों में योगदान दिया है. इसके अलावा प्रीति सूदन को ई-सिगरेट पर प्रतिबंध पर कानून बनाने का क्रेडिट दिया जाता है. प्रीति सूदन की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने इकोनॉमिक्स में M.Phil की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा उन्होंने लंदन के London School of Economics and Social Science LSE से सोशल साइंस में MSc किया हुआ है.

UPSC चेयरमैन की नियुक्ति का नियम –

UPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति सीधे राष्ट्रपति करते हैं. यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत होती है. सदस्य के तौर पर कम से कम आधे सदस्य किसी लोक सेवा के सदस्य (कार्यरत या अवकाशप्राप्त) होते हैं, जिन्हें भारत या राज्य की सरकार के तहत कम से कम 10 साल का अनुभव होता है. अनुच्छेद 317 के तहत UPSC के चेयरमैन और अन्य सदस्यों को सिर्फ राष्ट्रपति ही उनके पद से हटा सकते हैं. आपको बता दें UPSC के सदस्य अपने पद ग्रहण की तारीख से 6 साल की अवधि तक या 65 साल की आयु प्राप्त कर लेने तक (जो भी पहले हो) अपने पद पर रहते हैं. राज्य आयोग या संयुक्त आयोग के सदस्यों के लिए आयु सीमा 62 साल है.

 

 

 

 

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