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BREAKING : आजम खान के SC से मिली अंतरिम जमानत, यूपी सरकार ने किया था विरोध

Azam Khan gets interim bail from SC, UP government protested

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (सपा) नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है. गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजम खान की जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट तय करेगा व सामान्य जमानत के लिए आजम को समुचित और सक्षम अदालत में दो हफ्ते के भीतर अर्जी लगानी होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल कोर्ट से रेगुलर बेल मिलने तक अंतरिम आदेश लागू रहेगा. गौरतलब है कि 80 से अधिक मामलों में आजम खान पिछले 26 महीने से सीतापुर जेल में बंद हैं. वह एक केस में जमानत लेते तो दूसरा केस दायर हो जाता. इसके बाद आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां मंगलवार को सुनवाई हुई थी.

यूपी सरकार ने किया था जमानत का विरोध

मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल राजू ने आजम खान की जमानत का विरोध किया था. उन्होंने कहा था, ‘आजम खान ने ये बयान दिया था कि जिस एसडीएम ने मेरे खिलाफ मुकदमे लिखवाए, उसको मैं देख लूंगा. मेरी सरकार आने दो बस.’

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप ऐसा नहीं कर सकते राजू. बेल अलग मामला है और इसके बाद जेल अलग मामला. कोर्ट ने ये भी पूछा कि क्या उन मामलों में जमानत दी गई थी? इस सवाल पर असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि हां, लेकिन वह आदतन अपराधी है. जमानत नहीं दिए जाने का ये एक आधार है.

कपिल सिब्बल ने रखी थी ये दलीलें

असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल ने ये आरोप भी लगाया था कि आजम खान ने पूछताछ करने गए जांच अधिकारी को भी धमकी दी थी. आजम खान की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में एक ही शिकायतकर्ता ने पूरक शिकायत की है. आगे की जांच के लिए कोर्ट की ओर से मंजूरी नहीं दी गई है. वे खुद ही जांच कर रहे हैं जबकि ये केस 13 साल बाद दर्ज हुआ है. ये क्या हो रहा है? आजम खान के वकील ने ये भी कहा कि हम स्कूल नहीं चलाते. हमने कुछ भी नहीं किया है.

सरकार के वकील ने कहा- आजम खान भूमाफिया हैं

आजम खान को किसी भी तरह की राहत का विरोध करते हुए असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल ने कहा था कि करीब 19 मामले दर्ज हैं. उनकी ओर से ये याचिका केवल सहानुभूति के लिए दायर की गई है. वे भूमाफिया हैं. नया मामला फर्जी दस्तावेज से स्कूल को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कराने का है. केस दर्ज कराने वाले अधिकारी को धमकाने का भी मामला है.

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